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छत्तीसगढ़ राज्यसभा चुनाव 2026: भाजपा का ‘लोकल दांव’ बनाम कांग्रेस में ‘सिंघवी’ पर सस्पेंस

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रायपुर छत्तीसगढ़ की दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी रणभेरी बजते ही राज्य की राजनीति में स्पष्ट ध्रुवीकरण दिखने लगा है। जहाँ सत्ताधारी भाजपा ‘स्थानीयता और युवाओं’ के फॉर्मूले पर काम कर रही है, वहीं कांग्रेस के लिए ‘बाहरी बनाम स्थानीय’ का पुराना मुद्दा एक बार फिर गले की हड्डी बनता नजर आ रहा है।

भाजपा: युवा जोश और स्थानीय चेहरे पर फोकस

भाजपा सूत्रों की मानें तो इस बार दिल्ली दरबार से स्पष्ट संकेत हैं कि राज्यसभा के लिए किसी स्थानीय चेहरे को ही तरजीह दी जाएगी। पार्टी की रणनीति इस प्रकार दिख रही है:

  • उम्र का पैमाना: 40 से 55 वर्ष की आयु के ऊर्जावान नेताओं को प्राथमिकता देने की चर्चा है।

  • सोशल इंजीनियरिंग: बस्तर या सरगुजा जैसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों या किसी प्रभावशाली ओबीसी चेहरे को मौका देकर भाजपा आगामी समीकरण साधना चाहती है।

  • हारी हुई दिग्गजों की आस: विधानसभा चुनाव में हार का स्वाद चखने वाले कुछ बड़े नेता भी ‘पुनर्वास’ की उम्मीद में लॉबिंग कर रहे हैं।

कांग्रेस: सिंघवी की चर्चा और स्थानीय विरोध का स्वर

कांग्रेस खेमे में सबसे ज्यादा चर्चा वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी की है। तेलंगाना से उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है और वहां स्थानीय नेताओं के भारी विरोध के कारण छत्तीसगढ़ को उनके लिए सुरक्षित माना जा रहा है।

  • सिंघवी का पक्ष: पार्टी आलाकमान सिंघवी को संसद में भेजने का इच्छुक है क्योंकि वे कानूनी और रणनीतिक रूप से पार्टी के लिए अपरिहार्य हैं।

  • स्थानीय दबाव: छत्तीसगढ़ कांग्रेस के भीतर एक बड़ा धड़ा इस बात पर अड़ा है कि केटीएस तुलसी के बाद अब किसी बाहरी को नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़िया नेता को ही मौका मिले। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि इससे संगठन का मनोबल बढ़ेगा।

राज्यसभा का नंबर गेम

विधानसभा के मौजूदा संख्या बल (भाजपा: 54, कांग्रेस: 35) के अनुसार, दोनों दलों को एक-एक सीट मिलना तय है।

  • नामांकन: 26 फरवरी से 5 मार्च तक।

  • मतदान व परिणाम: 16 मार्च।


सियासी सार: भाजपा जहाँ अपनी ‘नई लीडरशिप’ तैयार करने के मूड में है, वहीं कांग्रेस के लिए चुनौती यह है कि वह आलाकमान की पसंद (सिंघवी) और स्थानीय भावनाओं के बीच संतुलन कैसे बिठाती है।

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