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‘हर-हर महादेव’: जब सवर्णों के सवालों का जवाब ‘कैलाश’ से आया!

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 व्यंग्य रिपोर्ट: आजकल लोकतंत्र में एक नया ‘साइलेंसर’ फिट हो गया है—इसका नाम है ‘जयकारा’। जब सवाल कड़वा हो और जवाब की पोटली खाली हो, तो बस फेफड़ों में हवा भरिए और जोर से कहिए “हर-हर महादेव!” यकीन मानिए, समस्या हल हो न हो, पत्रकार चुप जरूर हो जाते हैं।

बिहार की धरती पर कुछ ऐसा ही चमत्कार हुआ, जब केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय जी से यूजीसी (UGC) के नए नियमों पर सवर्णों की नाराजगी के बारे में पूछा गया।

महादेव भी सोच रहे होंगे—’मुझे बीच में क्यों लाए?’

मंत्री जी के पास मौका था कि वो डेटा बताते, नियमों की व्याख्या करते या कम से कम सवर्णों को ‘धैर्य’ का लॉलीपॉप ही थमा देते। लेकिन उन्होंने सोचा—”तर्क में क्या रखा है? भक्ति में शक्ति है।” जैसे ही पत्रकारों ने पूछा कि ‘मंत्री जी, सवर्ण नाराज हैं, कुछ कहेंगे?’, वैसे ही मंत्री जी ने अपनी राजनीतिक डिक्शनरी के पन्ने पलटे और सबसे सुरक्षित पन्ना निकाला: “हर-हर महादेव!”

 ऐसा लगा मानो यूजीसी की फाइलें अब शिक्षा मंत्रालय नहीं, बल्कि सीधे केदारनाथ धाम से स्वीकृत होकर आ रही हैं।

सवाल का ‘शार्ट-सर्किट’ और आस्था का ‘वोल्टेज’

पत्रकारों को लगा था कि उन्हें हेडलाइन मिलेगी, पर उन्हें मिला ‘प्रसाद’। मंत्री जी ने एक के बाद एक कई नारे लगाए।

  • पत्रकार: मंत्री जी, सवर्णों का गुस्सा…

  • मंत्री जी: हर-हर महादेव!

  • पत्रकार: मंत्री जी, नई नियमावली से नौकरियां…

  • मंत्री जी: भारत माता की जय!

यह नजारा देखकर ऐसा लगा मानो मंत्री जी किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं, बल्कि किसी कांवड़ यात्रा के नेतृत्व में खड़े हैं। सवर्ण समाज जो अब तक अपनी शिकायतों के कागज लिए खड़ा था, वो भी सोच में पड़ गया होगा कि उनकी फाइल ‘डस्टबिन’ में गई है या ‘दानपात्र’ में।

नया लोकतांत्रिक फॉर्मूला

इस घटना ने देश के प्रवक्ताओं को एक नया फॉर्मूला दे दिया है:

  1. अगर बेरोजगारी पर सवाल हो, तो “जय श्री राम” बोलें।

  2. अगर महंगाई पर घेरा जाए, तो “राधे-राधे” कहें।

  3. और अगर यूजीसी या सवर्णों का मामला हो, तो “हर-हर महादेव” से बेहतर कुछ नहीं।

 नित्यानंद राय जी ने साबित कर दिया कि जब सियासत में ‘इक्विटी’ (Equity) और ‘रिजर्वेशन’ जैसे शब्द गले की हड्डी बन जाएं, तो धर्म की शरण लेना सबसे सुखद होता है। सवर्णों को भले ही नौकरी या प्रमोशन में अपना भविष्य धुंधला दिख रहा हो, लेकिन मंत्री जी ने कम से कम उनका ‘परलोक’ तो सुधारने की कोशिश कर ही दी है।The Khatiya Khadi News 

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