नई दिल्ली 28 जनवरी 2026 : देश में एसिड अटैक की बढ़ती घटनाओं और पीड़ितों की बदहाली पर उच्चतम न्यायालय ने कड़ा संज्ञान लिया है। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल सजा काफी नहीं, बल्कि पीड़ितों का सम्मानजनक पुनर्वास और दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो समाज में मिसाल बने।
राज्यों को 4 सप्ताह का अल्टीमेटम
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति आर महादेवन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने निम्नलिखित जानकारी मांगी है:
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अदालतों में लंबित मामलों की कुल संख्या और दाखिल चार्जशीट की स्थिति।
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उन खौफनाक मामलों का विवरण जिनमें पीड़ितों को जबरन तेजाब पिलाया गया।
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पीड़ितों को दी गई अब तक की अपर्याप्त सजाओं का रिकॉर्ड।
‘दहेज हत्या’ की तर्ज पर बने कानून: केंद्र को सुझाव
सुनवाई के दौरान पीठ ने एसिड हमले के दोषियों के लिए असाधारण दंडात्मक उपायों का समर्थन किया। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह कानून में संशोधन पर विचार करे, ताकि एसिड अटैक के मामलों से ‘दहेज हत्या’ (Section 304B) जैसे सख्त प्रावधानों की तर्ज पर निपटा जा सके। कोर्ट ने माना कि वर्तमान सजाएं अपराध की भयावहता के मुकाबले काफी कम हैं।
सिर्फ न्याय नहीं, पुनर्वास पर जोर
न्यायालय ने इस बात पर चिंता जताई कि हमले के बाद पीड़ितों का जीवन नरक बन जाता है। इसके लिए राज्यों से हर पीड़ित का ‘प्रोफाइल’ मांगा गया है, जिसमें शामिल है:
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पीड़ित की शैक्षणिक योग्यता और रोजगार की स्थिति।
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वैवाहिक स्थिति और अब तक हुआ इलाज का खर्च।
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भविष्य के चिकित्सा खर्च और राज्य की पुनर्वास योजना का पूरा खाका।
मामले की पृष्ठभूमि: यह आदेश हरियाणा की एसिड अटैक सर्वाइवर शाहीन मलिक द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आया है, जो लंबे समय से इन पीड़ितों के हक की लड़ाई लड़ रही हैं।








