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भ्रष्टाचार का ‘रेडी टू ईट’ खेल: कोरबा में अपात्र समूह को फायदा पहुँचाने की कोशिश नाकाम, कमिश्नर कोर्ट ने पलटा फैसला

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कोरबा। आकांक्षी जिला कोरबा में सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण आहार 2.0 योजना के तहत ‘रेडी टू ईट’ और फोर्टीफाइड आटा आपूर्ति के चयन में मची धांधली अब खुलकर सामने आ गई है। कटघोरा परियोजना में नियमों को ताक पर रखकर चहेते समूह को लाभ पहुँचाने के प्रयास पर बिलासपुर कमिश्नर कोर्ट ने कड़ा प्रहार किया है। कोर्ट ने फर्जी तरीके से अंक हासिल करने वाले ‘जय दुर्गा महिला स्व सहायता समूह’ को अपात्र घोषित करते हुए, वास्तविक हकदार ‘संतोषी स्व सहायता समूह मलगांव’ को कार्य देने का आदेश जारी किया है।

₹20 लाख का ‘संदेहास्पद’ लेन-देन और अंकों की हेराफेरी

मामले का खुलासा तब हुआ जब चयन प्रक्रिया के दौरान जय दुर्गा समूह के बैंक खाते में विज्ञापन जारी होने के ठीक बाद एक ही दिन (19 अप्रैल 2025) में ₹20 लाख की भारी-भरकम राशि जमा की गई। इस राशि के दम पर समूह ने वित्तीय क्षमता के 4 निर्णायक अंक हासिल कर लिए और चयन सूची में प्रथम स्थान पा लिया।

कमिश्नर कोर्ट ने अपने अवलोकन में पाया कि विज्ञापन 4 अप्रैल को निकला और राशि 19 अप्रैल को जमा हुई, जो स्पष्ट करता है कि यह पैसा केवल अंक प्राप्त करने के उद्देश्य से बाहरी स्रोतों से डलवाया गया था। कोर्ट ने इसे “संदेहास्पद” करार देते हुए समूह के 4 अंक काट दिए, जिसके बाद संतोषी समूह 81 अंकों के साथ शीर्ष पर आ गया।

अधिकारियों की भूमिका पर सुलगते सवाल

इस पूरे प्रकरण ने जिला पंचायत और महिला एवं बाल विकास विभाग (DPO) की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। चर्चा है कि भोले-भाले ग्रामीण समूहों की आड़ में विभाग के भीतर बैठे कुछ ‘सफेदपोश’ मास्टरमाइंड इस स्क्रिप्ट को लिख रहे हैं। सवाल यह है कि क्या समूह की महिलाओं को वित्तीय नियमों की इतनी बारीक समझ थी, या उन्हें मोहरा बनाकर भ्रष्टाचार का खेल खेला गया? पूर्व में चोटिया परियोजना में भी इसी तरह की गड़बड़ी सामने आ चुकी है।

वर्जन

“कमिश्नर कोर्ट से कटघोरा परियोजना के समूह चयन के संदर्भ में जो आदेश प्राप्त हुए हैं, उनका अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाएगा और पृथक से नियुक्ति आदेश जारी किए जाएंगे।” — बसंत मिंज, डीपीओ, महिला एवं बाल विकास विभाग, कोरबा

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