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छत्तीसगढ़ में 706 करोड़ रुपये के निष्क्रिय बैंक खाते: क्या आपका पैसा फंसा है?

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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के बैंकों में 18.31 लाख से ज्यादा निष्क्रिय खातों में 706.32 करोड़ रुपये जमा हैं। ये खाते ऐसे लोगों के हैं जो या तो अपने खातों को भूल गए हैं या उनका पता नहीं चल रहा।

बता दें कि यह पैसा उन लोगों का है जो अपने खातों को संचालित करना भूल गए हैं या जिनका कोई पता नहीं चल रहा.

राज्य के बैंक इस रकम को वापस करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनकी मेहनत में कमी साफ दिख रही है. अगर समय रहते यह काम नहीं हुआ, तो यह सारा पैसा दूसरी जगह चला जाएगा.

कितने खाते और कितनी रकम निष्क्रिय?

राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कुल 18.31 लाख से अधिक बैंक खाते लंबे समय से निष्क्रिय हैं. इन खातों में जमा कुल राशि 706.32 करोड़ रुपये है. रायपुर में सबसे ज्यादा 2.57 लाख खाते इनएक्टिव हैं. बिलासपुर में 1.73 लाख खाते ऐसे ही पड़े हैं.

इस रकम का बड़ा हिस्सा आम लोगों का है. इसमें 533.59 करोड़ रुपये सामान्य खाताधारकों के हैं, 43 करोड़ से ज्यादा औद्योगिक ग्राहकों के और 108.87 करोड़ रुपये सरकारी फंड के हैं.

आरबीआई का अभियान और डेडलाइन

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे ‘आपकी पूंजी आपका अधिकार’ नाम के अभियान के तहत इन निष्क्रिय खातों को सक्रिय करें. इसका मकसद लोगों तक उनकी जमा राशि पहुंचाना है.

आरबीआई के नियम के अनुसार अगर किसी खाते में 10 साल तक कोई लेन-देन नहीं होता, तो वह पूरी रकम आरबीआई के विशेष फंड में ट्रांसफर हो जाती है. यह फंड शिक्षा और जागरूकता के कामों में इस्तेमाल होता है. बैंकों को 31 दिसंबर तक खाताधारकों को ढूंढकर पैसा लौटाना जरूरी है.

एसबीआई का प्रदर्शन सबसे कमजोर

राज्य के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की स्थिति सबसे चिंताजनक है. एसबीआई में अकेले 2.50 लाख निष्क्रिय खाते हैं, जिनमें करीब 250 करोड़ रुपये जमा हैं. हालांकि, बैंक ने अब तक सिर्फ 10 प्रतिशत खातों को ही सक्रिय कर पाया है.

रायपुर की एक शाखा में जांच करने पर पता चला कि कर्मचारी अभियान की सही जानकारी नहीं दे पा रहे. लोग पूछताछ करने आते हैं लेकिन जवाब न मिलने से निराश लौट जाते हैं. बैंक के अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि सभी शाखाओं को बेहतर इंतजाम करने के आदेश दिए गए हैं. अगर कोई गड़बड़ी मिली, तो सख्त कदम उठाए जाएंगे.

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