कोयले की धूल पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख: SECL के CMD को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का आदेश
बिलासपुर : निर्माणाधीन ओवरब्रिज के आसपास कोयला परिवहन से उड़ने वाली धूल और स्थानीय रहवासियों के स्वास्थ्य पर मंडराते खतरे को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के CMD को 31 अगस्त तक नया व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश दिया है।

अदालत के प्रमुख निर्देश और रुख:
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ठोस उपायों का मांगा हिसाब: कोर्ट ने साफ किया है कि SECL को केवल औपचारिक जानकारी के बजाय धूल नियंत्रण के लिए उठाए गए विशिष्ट और व्यावहारिक कदमों का विस्तृत ब्यौरा देना होगा।
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स्वास्थ्य सुरक्षा पर जवाबदेही: कोयला ट्रकों और भारी वाहनों की आवाजाही से प्रभावित क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य व कल्याण की रक्षा के लिए बनाई गई कार्ययोजना की जानकारी देनी होगी।
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परिवहन मार्ग पर निगरानी: ओवरब्रिज निर्माण क्षेत्र के पास ट्रकों से उड़ने वाले कोयले के कणों को रोकने के लिए इस्तेमाल की जा रही तकनीकों और उपायों पर स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
30 जुलाई 2026 के अदालती आदेश के बाद राज्य सरकार ने SECL अधिकारियों को नोटिस जारी किया था। सुनवाई के दौरान SECL वकील द्वारा समय मांगे जाने पर बेंच ने CMD से सीधी रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 31 अगस्त 2026 को तय की गई है।
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