नई दिल्ली: भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में जल्द ही एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ने वाला है। देश को अपनी पहली महिला मुख्य न्यायाधीश (CJI) मिलने का रास्ता साफ हो गया है। संसद में हाल ही में पारित उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 के बाद, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना सितंबर 2027 में देश के सर्वोच्च न्यायिक पद की कमान संभालेंगी।
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वरिष्ठता के सिद्धांत के अनुसार, वह 23 सितंबर 2027 को भारत की पहली महिला CJI के रूप में शपथ लेंगी। उनका यह कार्यकाल भले ही लगभग 36 दिनों (29 अक्टूबर 2027 तक) का होगा, लेकिन यह भारतीय न्याय के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। खास बात यह है कि वह अपने पिता के बाद CJI पद पर पहुंचने वाली देश की पहली बेटी भी होंगी। आइए जानते हैं उनके अब तक के सफर और बड़े फैसलों के बारे में विस्तार से:
कौन हैं जस्टिस बी.वी. नागरत्ना?
30 अक्टूबर 1962 को बेंगलुरु में जन्मी जस्टिस नागरत्ना का कानूनी और न्यायिक पृष्ठभूमि से गहरा नाता रहा है। उनके पिता जस्टिस ई. एस. वेंकटरमैया वर्ष 1989 में देश के 19वें मुख्य न्यायाधीश रहे थे। यदि वह 2027 में CJI बनती हैं, तो यह पहला मौका होगा जब पिता और पुत्री दोनों ने देश के सर्वोच्च न्यायिक पद को संभाला हो।
शिक्षा और शानदार करियर सफर:
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1984: दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित जीजस एंड मैरी कॉलेज से इतिहास में बीए (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की।
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1987: कैंपस लॉ सेंटर (DU) से एलएलबी की डिग्री ली और इसी वर्ष वकालत की शुरुआत की।
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1994: स्वतंत्र प्रैक्टिस शुरू की और प्रशासनिक, वाणिज्यिक तथा पारिवारिक मामलों में अपनी विशेष पहचान बनाई।
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2008-2010: कर्नाटक हाईकोर्ट में पहले एडिशनल जज और फिर परमानेंट जज के रूप में नियुक्त हुईं।
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21 अगस्त 2021: देश के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की जज के रूप में पदभार संभाला।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना के चर्चित और ऐतिहासिक फैसले:
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नोटबंदी पर असहमति (2023): वर्ष 2016 की नोटबंदी के फैसले को जब संविधान पीठ के 4 जजों ने वैध ठहराया था, तब जस्टिस नागरत्ना ने असहमति जताते हुए कहा था कि इतना बड़ा निर्णय केवल कार्यकारी आदेश से नहीं, बल्कि संसद के माध्यम से होना चाहिए था।
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बिलकिस बानो केस (2024): इस चर्चित मामले में उन्होंने गुजरात सरकार द्वारा 11 दोषियों की समयपूर्व रिहाई को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि सजा महाराष्ट्र में हुई थी, इसलिए रिहाई का अधिकार भी महाराष्ट्र सरकार के पास है।
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नेताओं के बयान (2023): संविधान पीठ का हिस्सा रहते हुए उन्होंने स्पष्ट किया था कि सरकार अपने मंत्रियों के व्यक्तिगत बयानों के लिए सीधे तौर पर उत्तरदायी नहीं है।
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‘कोई बच्चा अवैध नहीं होता’: कर्नाटक हाईकोर्ट में अपने एक फैसले के दौरान उन्होंने ऐतिहासिक टिप्पणी की थी कि माता-पिता के संबंध भले गैर-कानूनी हो सकते हैं, लेकिन कोई भी बच्चा अवैध नहीं होता और वह अनुकंपा नियुक्ति का हकदार है।
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कोरोना काल में राहत: महामारी के दौरान उन्होंने कर्नाटक सरकार को स्कूली बच्चों के लिए मिड-डे मील और डिजिटल शिक्षा सुचारू रूप से जारी रखने के सख्त निर्देश दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट में अब जजों की संख्या बढ़कर हुई 38
केंद्रीय राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 (1 CJI + 37 अन्य जज) कर दिया गया है। 1950 में जब शीर्ष अदालत की स्थापना हुई थी, तब यहाँ केवल 8 जज हुआ करते थे, लेकिन समय के साथ न्याय प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं F








