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धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान: छत्तीसगढ़ के 160 गांवों में सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन के लिए प्रत्येक ग्रामसभा को मिलेगी 15 लाख की राशि

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मुख्य बिंदु:

  • योजना: धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान

  • चयनित क्षेत्र: छत्तीसगढ़ राज्य के 160 गांव (क्लस्टर आधारित और परस्पर जुड़े क्षेत्रों के आधार पर)

  • वित्तीय सहायता: प्रत्येक चयनित ग्रामसभा को 15 लाख रुपये की स्वीकृति

  • मुख्य उद्देश्य: अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम-2006 का प्रभावी क्रियान्वयन

 रायपुर  3 अगस्त Dharti Aaba Abhiyan : छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने वन क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों के अधिकारों को मजबूत करने और वनों के संरक्षण व आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के तहत प्रदेश के 160 गांवों का चयन निर्धारित मानदंडों के आधार पर किया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम-2006 का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।

सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजना (CFRMP):

चयनित सभी 160 गांवों में सामुदायिक वन संसाधन (CFR) के संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन के लिए विशेष रूप से ‘सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजना’ तैयार कर लागू की जाएगी। इस योजना के बेहतर संचालन और क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक ग्रामसभा को 15 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की जा चुकी है।

बैंक खाता और प्रबंधन समितियां:

आदिम जाति विभाग द्वारा संबंधित जिलों के कलेक्टरों को इस संबंध में आधिकारिक पत्र जारी कर दिया गया है। पत्र में निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक चयनित ग्रामसभा में ‘सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति’ का गठन किया जाए, जो ग्रामसभा के मार्गदर्शन में योजनाओं का संचालन करेगी। पारदर्शिता और सुगमता के लिए ग्रामसभा के नाम पर राष्ट्रीयकृत बैंक में एक सिंगल करंट अकाउंट भी खोला गया है।

क्लस्टर आधारित चयन और तकनीकी सहयोग:

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि गांवों का चयन क्लस्टर आधारित और परस्पर जुड़े क्षेत्रों की प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी हो सके। इसके अतिरिक्त, योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए तकनीकी सहयोग, सिविल सोसायटी संगठनों और स्थानीय संस्थाओं की सेवाएं भी ली जा सकेंगी। हालांकि, इन संस्थाओं की मदद केवल ग्रामसभा के प्रस्ताव और विधिवत अनुमोदन के बाद ही ली जाएगी, जो वन संसाधन प्रबंधन योजना तैयार करने और उसकी निगरानी में सहायता करेंगी।

शासन का दृष्टिकोण:

आदिम जाति विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस महत्वपूर्ण पहल से धरातल पर वन अधिकार अधिनियम-2006 का क्रियान्वयन मजबूत होगा। इससे न केवल ग्रामसभाएं अधिक सशक्त होंगी, बल्कि सामुदायिक वनों के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय आदिवासियों के आजीविका के अवसरों को भी एक नई गति मिलेगी।

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