पटना 3 अगस्त Bankipur By election : बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक और भूचाल लाने वाला परिणाम सामने आया है। पटना की सबसे चर्चित और हॉट सीट मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने शानदार जीत दर्ज की है। पहली बार चुनावी मैदान में उतरे प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार नीरज सिन्हा को लगभग 18,553 वोटों के अंतर से करारी शिकस्त दी है। इस जीत के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि बांकीपुर सीट को पिछले तीन दशकों से बीजेपी का अजय किला माना जाता रहा है।

30 साल का किला, तीस राउंड में ढहा: प्रशांत किशोर
अपनी ऐतिहासिक जीत के बाद जोश से भरे प्रशांत किशोर ने मीडिया से बात करते हुए एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, “हमने तीस साल का किला, तीस में ढहा दिया।”
यह जीत इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि प्रशांत किशोर ने अब तक सिर्फ चुनावी रणनीतिकार की भूमिका निभाई थी, लेकिन इस उपचुनाव के जरिए उन्होंने पहली बार खुद एक राजनीतिक दल और उम्मीदवार के रूप में जनता के बीच सीधा मुकाबला किया और बड़ी सफलता हासिल की।
क्यों खाली हुई थी बांकीपुर सीट? और क्या है इसका राजनीतिक समीकरण?
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नितिन नवीन का इस्तीफा: बांकीपुर विधानसभा सीट पर वर्ष 2006 से लगातार नितिन नवीन विधायक चले आ रहे थे। हाल ही में उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया, जिसके बाद उन्हें संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा का सदस्य बना दिया गया।
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सीट का खाली होना और उपचुनाव: नितिन नवीन के राष्ट्रीय राजनीति में जाने और विधायक पद से इस्तीफा देने के कारण यह सीट रिक्त हुई थी, जिस पर उपचुनाव कराया गया।
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पीएम मोदी और नितिन नवीन का कनेक्शन: नितिन नवीन के भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें हल्के-फुल्के अंदाज में अपना ‘बॉस’ कहकर संबोधित किया था। लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी के उसी ‘बॉस’ के राजनीतिक गढ़ में बीजेपी को इस बुरी हार का सामना करना पड़ा है, जिसे पार्टी के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।
बीजेपी के लिए बड़ा झटका, जन सुराज के लिए टर्निंग पॉइंट
1995 से लगातार यानी पिछले तीन दशकों से बांकीपुर सीट पर भारतीय जनता पार्टी का एकछत्र राज रहा है। यह सीट बीजेपी के सबसे सुरक्षित और मजबूत गढ़ों में गिनी जाती थी। ऐसे में, इस हाई-प्रोफाइल सीट का भाजपा के हाथ से निकल जाना पार्टी के केंद्रीय और राज्य नेतृत्व के लिए गहरी आत्मसमिक्षा का विषय बन गया है।
दूसरी ओर, चुनावी राजनीति में पहली बार कदम रखने वाले प्रशांत किशोर के लिए यह प्रदर्शन उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता, रणनीतिक क्षमता और बिहार में उनके बढ़ते जनाधार का एक बहुत बड़ा प्रमाण है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर का यह परिणाम आने वाले समय में बिहार की राजनीति की पूरी दिशा और दशा तय कर सकता है।
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