कोरबा 29 जुलाई : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक घमासान सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने कटघोरा नगर पालिका परिषद के अटल परिसर में स्थापित देश के पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा के निर्माण और सामग्री खरीदी में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का सनसनीखेज आरोप लगाया है।

इस मामले में बीजेपी जिलाध्यक्ष ने सीधे तौर पर कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही, उन्होंने नगर पालिका परिषद कटघोरा के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) को तत्काल बर्खास्त कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग उठाई है।
क्या है पूरा मामला? (वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप)
गोपाल मोदी ने अपनी शिकायत में विभिन्न समाचार माध्यमों और जनसामान्य से मिली जानकारियों का हवाला देते हुए बताया कि अटल परिसर में स्थापित प्रतिमा के निर्माण कार्य में भारी भ्रष्टाचार किया गया है।
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ब्रॉन्ज के नाम पर धोखा: आरोप है कि अनुबंध और भुगतान के समय ‘ब्रॉन्ज’ (कांस्य) सामग्री के नाम पर राशि निकाली गई, जबकि धरातल पर प्रतिमा निर्माण में ब्रॉन्ज के स्थान पर निम्न गुणवत्ता की सामग्री या कंक्रीट का उपयोग किया गया है।
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लाखों की हेराफेरी: इस पूरे प्रकरण में लगभग ₹13.60 लाख की वित्तीय अनियमितता होने की गहरी आशंका जताई गई है।
“जनता के विश्वास के साथ गंभीर छल” — गोपाल मोदी
बीजेपी जिलाध्यक्ष ने कड़े शब्दों में हमला बोलते हुए कहा कि यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सिर्फ सरकारी धन का दुरुपयोग भर नहीं है, बल्कि देश के महान सपूत और जनता के विश्वास के साथ किया गया एक गंभीर छल है।
उन्होंने दो टूक कहा कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ बख्शे जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता। दोषियों के विरुद्ध इतनी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए कि भविष्य में कोई भी भ्रष्ट अधिकारी या ठेकेदार सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का दुस्साहस तक न कर सके।
कलेक्टर से की गई मुख्य मांगें
गोपाल मोदी ने जिला कलेक्टर के समक्ष निम्नलिखित बिंदुओं पर त्वरित कार्रवाई की मांग रखी है:
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स्वतंत्र एजेंसी से जांच: पूरे मामले की किसी स्वतंत्र उच्चस्तरीय एजेंसी या वरिष्ठ अधिकारियों के दल से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
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तकनीकी गुणवत्ता की जांच: प्रतिमा निर्माण में उपयोग की गई सामग्री की विशेषज्ञों से जांच करवाई जाए।
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दस्तावेजों की वित्तीय पड़ताल: निविदा प्रक्रिया, मापन पुस्तिका (M.B.), बिल, वाउचर, भुगतान प्रक्रिया और अन्य संबंधित अभिलेखों की सूक्ष्म वित्तीय जांच हो।
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कठोर कानूनी और विभागीय कार्रवाई: जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों, संलिप्त जनप्रतिनिधियों और ठेकेदार के खिलाफ सख्त विभागीय व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
“भ्रष्टाचार के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति”
अंत में, गोपाल मोदी ने दोहाराया कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा से भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी प्रशासन की पक्षधर रही है। जनहित, सुशासन और शासन की साख को बनाए रखने के लिए इस गंभीर मामले में प्रशासन को बिना किसी विलंब के शीघ्र, निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई करनी होगी।
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