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कोरबा का जल संरक्षण मॉडल: ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की सराहना, देश के लिए बना अनुकरणीय उदाहरण

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मुख्य बिंदु
  • राष्ट्रीय पहचान: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड में कोरबा के जल संरक्षण कार्यों का उल्लेख किया।

  • नवाचार: ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत इसरो के तकनीकी परामर्श से शहर में रिचार्ज वेल्स का निर्माण किया गया है।

  • जनभागीदारी: जिले में अब तक कुल 1,728 रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट स्थापित किए जा चुके हैं।

  • अपील: कलेक्टर और निगमायुक्त ने नागरिकों से जल संरक्षण और वृक्षारोपण अभियान से जुड़ने का आह्वान किया है।

कोरबा, 26 जुलाई 2026 Mann Ki Baat Episode 136 , PM Modi : जल संरक्षण के क्षेत्र में कोरबा जिले के नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण पहचान मिली है। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 136वें एपिसोड में कोरबा नगर पालिक निगम द्वारा कैच द रेन अभियान के अंतर्गत किए जा रहे वर्षा जल संचयन कार्यों की खुले दिल से सराहना की। प्रधानमंत्री ने इसे जल संवर्धन की एक बेहद प्रभावी पहल बताया, जो कोरबा जिला प्रशासन, नगर पालिक निगम और समस्त जिलेवासियों के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।

इसरो के सहयोग से बने रिचार्ज वेल्स

कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत के कुशल मार्गदर्शन तथा नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री आशुतोष पांडेय के नेतृत्व में जल संरक्षण को एक जनआंदोलन का रूप दिया गया है। वर्षा जल का अधिकतम संचयन और भूजल स्तर (Groundwater Level) को ऊपर उठाने के लिए शहर में कई तकनीकी और स्थायी कदम उठाए गए हैं। एसएएम-2.0 योजना के अंतर्गत शहर के 10 अलग-अलग स्थानों पर अत्याधुनिक रिचार्ज वेल्स का निर्माण कराया गया है। इनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इनका निर्माण नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (इसरो) के तकनीकी विशेषज्ञों के परामर्श से ‘इंजेक्ट वेल’ पद्धति के आधार पर किया गया है। भारी बारिश के दौरान सड़कों और नालियों में बहकर बर्बाद होने वाले पानी को इन वेल्स के जरिए सीधे जमीन के भीतर पहुंचाया जा रहा है, जिससे भूजल स्तर में लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग और अनिवार्य नियम

नगर निगम ने जनसहयोग से इस अभियान को आगे बढ़ाते हुए शासकीय भवनों में 757 और निजी भवनों में 971 यानी कुल 1,728 रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट स्थापित करवाए हैं। इसके अलावा, भवन अनुज्ञा विभाग के नियमों में कड़ाई करते हुए हर नई भवन निर्माण अनुमति में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य प्रावधान बना दिया गया है। सामुदायिक भवनों, स्कूलों के अतिरिक्त कक्षों, आंगनबाड़ी और मंगल भवनों के निर्माण में भी इसे जरूरी कर दिया गया है। वर्तमान में ऐसे 109 निर्माण कार्यों के लिए कार्यादेश जारी हो चुके हैं। साथ ही, शहर के 95 अनुपयोगी और क्षतिग्रस्त बोरवेल्स की पहचान कर उन्हें री-ड्रिलिंग के जरिए रिचार्ज संरचनाओं में बदला जा रहा है।

‘एक पेड़ माँ के नाम’ और वृहद वृक्षारोपण अभियान

जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन के लिए जिले में बड़े पैमाने पर पौधरोपण भी जारी है। कोरबा और कटघोरा वनमंडल द्वारा इस वर्ष ढाई लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत के निर्देशों के तहत 15 सितंबर तक एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत सघन वृक्षारोपण किया जा रहा है। गत 18 जुलाई को नगर निगम द्वारा “रन फॉर ग्रीन कोरबा” का आयोजन किया गया था, जिसमें नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बीबी-राम-जी अभियान के तहत पौधों का वितरण कर सभी सरकारी दफ्तरों के परिसरों में हरियाली को बढ़ावा दिया जा रहा है।

अधिकारियों की अपील

प्रधानमंत्री द्वारा कोरबा के इस मॉडल को सराहे जाने के बाद कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत और निगमायुक्त श्री आशुतोष पांडेय ने संयुक्त रूप से सभी नागरिकों, संस्थानों और व्यापारियों से अपील की है कि वे अपने परिसरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाएं और अधिक से अधिक पौधे रोपकर इस अभियान को सफल बनाएं। कोरबा का यह मॉडल अब देश भर के अन्य शहरी निकायों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुका है।

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