नई दिल्ली/गुरुग्राम 24 जुलाई:
लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने लगभग 25 दिनों से जारी अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया है। सेहत बिगड़ने के कारण वे गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती थे, जहाँ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने उनसे मुलाकात की।
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मंत्रियों द्वारा यह आश्वासन मिलने के बाद कि NEET-UG और शिक्षा सुधारों से जुड़े विरोध प्रदर्शनों में शामिल युवाओं और छात्रों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक या पुलिस कार्रवाई (FIR) नहीं की जाएगी, वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने का फैसला किया।
क्या थी मुख्य वजह और मांगें?
यह आंदोलन NEET-UG परीक्षा में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक और व्यापक शिक्षा सुधारों की मांगों को लेकर छात्रों द्वारा चलाए जा रहे विरोध प्रदर्शन के समर्थन में शुरू हुआ था। सोनम वांगचुक जून के अंत से ही छात्रों की मांगों और उनकी सुरक्षा को लेकर अनशन पर बैठे थे।
स्वास्थ्य स्थिति और वांगचुक का संदेश
लगातार 25-26 दिनों के अनशन के कारण सोनम वांगचुक का वजन काफी गिर गया था और शरीर बेहद कमजोर हो गया था। हालांकि, मेदांता अस्पताल से संदेश देते हुए उन्होंने कहा, “शरीर कमजोर हुआ है, वजन कम हुआ है, लेकिन हौसला बुलंद है—अभी भी जिंदा हूं।”
सरकार के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के दौरान वांगचुक ने मुख्य रूप से यही शर्त रखी थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसी भी युवा या छात्र का भविष्य पुलिस केस या दंडात्मक कार्रवाई से खराब नहीं होना चाहिए। सरकार द्वारा सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद उन्होंने जूस पीकर अपना उपवास समाप्त किया।
प्रमुख बिंदु
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अनशन की अवधि: जून के अंत से शुरू होकर लगभग 25-26 दिनों तक चला।
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प्रमुख आश्वासन: शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी छात्रों/युवाओं के खिलाफ कोई FIR या दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा।
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मंत्रियों की मौजूदगी: केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने अस्पताल पहुँचकर मुलाकात की।
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मुख्य मुद्दा: NEET-UG परीक्षा विवाद, पेपर लीक और शिक्षा सुधार।
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