बिलासपुर, 22 जुलाई 2026 — बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और पुनर्वास को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आज बिलासपुर पुलिस द्वारा पुलिस ग्राउंड स्थित बिलासगुड़ी हॉल में जिला स्तरीय बाल संरक्षण हितधारकों की तृतीय अभिसरण बैठक का आयोजन किया गया। यूनिसेफ (UNICEF) और ‘काउंसेल टू सिक्योर जस्टिस’ (CSJ) के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस बैठक में जिले के विभिन्न विभागों ने बाल कल्याण के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक के मुख्य बिंदु और पहल
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‘दिशांत’ कार्यक्रम की समीक्षा: कानून से संघर्षरत बच्चों के पुनर्वास के लिए चलाए जा रहे ‘दिशांत – नव नभ की ओर’ कार्यक्रम की उपलब्धियों और प्रगति रिपोर्ट साझा की गई।
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मानसिक स्वास्थ्य व नशामुक्ति: बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श सेवाओं के विस्तार और नशामुक्ति सेवाओं की सुलभता सुनिश्चित करने पर गहन चर्चा हुई।
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रात्रिकालीन विद्यालय की योजना: स्कूल छोड़ चुके (आउट-ऑफ-स्कूल) बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने के लिए रात्रिकालीन विद्यालय जैसी अभिनव पहल विकसित करने पर सहमति बनी।
‘बाल-अनुकूल समाज के लिए अंतर-विभागीय समन्वय जरूरी’
बैठक की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) श्री रजनेश सिंह ने कहा:
“बच्चों के समग्र संरक्षण और सकारात्मक विकास के लिए पुलिस, न्याय प्रणाली और सामाजिक संस्थाओं के बीच निरंतर सहयोग और तालमेल अत्यंत आवश्यक है। हमें मिलकर एक संवेदनशील और बाल-अनुकूल संरक्षण तंत्र का निर्माण करना होगा।”
बैठक में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के सचिव श्री अनिल कुमार चौहान और CSJ की वरिष्ठ निदेशक सुश्री उर्वशी तिलक विशेष रूप से उपस्थित रहे।
विभिन्न विभागों की सक्रिय सहभागिता
इस अभिसरण बैठक में किशोर न्याय बोर्ड (JJB), बाल कल्याण समिति (CWC), महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग, श्रम विभाग, समाज कल्याण विभाग, सेंदरी मानसिक चिकित्सालय, विभिन्न NGOs, NTPC व SECL के CSR प्रतिनिधि तथा थानों के चाइल्ड वेलफेयर पुलिस अधिकारियों (CWPOs) ने भाग लिया।








