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कुपोषण के खिलाफ छत्तीसगढ़ का बड़ा कदम: ‘हर-घर मुनगा, घर-घर सुपोषण’ अभियान बना जनआंदोलन

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रायपुर, 11 जुलाई 2026

छत्तीसगढ़ को कुपोषण और एनीमिया से मुक्त करने के लिए राज्य सरकार ने एक अनूठी पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के ‘स्वस्थ छत्तीसगढ़’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेशभर में “हर-घर मुनगा, घर-घर सुपोषण” अभियान चलाया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के आह्वान पर अब यह अभियान एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है, जिसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर ही परिवारों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना है।

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बस्तर से सरगुजा तक गूंज, पोषण वाटिकाओं में रोपे जा रहे पौधे

इस विशेष अभियान के तहत बस्तर के वनांचल से लेकर सरगुजा और मैदानी इलाकों के आंगनबाड़ी केंद्रों, पोषण वाटिकाओं और आम नागरिकों के घरों में मुनगा (सहजन) के पौधे लगाए जा रहे हैं। अभियान की शुरुआत महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सुकमा जिले के लस्केपारा स्थित सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के साथ मुनगा और पपीते के पौधे लगाकर की। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से पर्यावरण संरक्षण और बेहतर स्वास्थ्य के लिए अपने घरों में मुनगा लगाने की अपील की।

इनोवेटिव आइडिया: ‘मुनगा पौधारोपण विथ सेल्फी’

प्रदेश के विभिन्न जिलों में इस अभियान को दिलचस्प तरीकों से बढ़ावा दिया जा रहा है:

  • बेमेतरा जिला: यहाँ ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना के अंतर्गत “मुनगा पौधारोपण विथ सेल्फी अभियान” चलाया गया। इसके तहत गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों और एनीमिक गर्भवती महिलाओं के घरों में 18 पौधे रोपे गए और लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से इसके संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया।

  • बलरामपुर जिला: रामचंद्रपुर विकासखंड सहित कई क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की मौजूदगी में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया।

क्यों खास है मुनगा (सहजन)?

अभियान के दौरान विभागीय अधिकारियों और कार्यकर्ताओं द्वारा ग्रामीणों को मुनगा के चमत्कारी फायदों के प्रति जागरूक किया जा रहा है:

  • पोषक तत्वों का खजाना: मुनगा की पत्तियां, फूल और फलियां आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-ए और विटामिन-सी से भरपूर होती हैं।

  • एनीमिया से मुक्ति: इसका नियमित सेवन बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं में खून की कमी (एनीमिया) को दूर करने में बेहद कारगर है।

  • शारीरिक व मानसिक विकास: यह बच्चों के समग्र शारीरिक और मानसिक विकास में सहायक है।

“कुपोषण के खिलाफ यह लड़ाई सिर्फ सरकारी योजनाओं के भरोसे नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जीती जाएगी। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक संसाधनों का सही उपयोग कर हम बच्चों और माताओं को एक स्वस्थ भविष्य दे सकते हैं।”

— श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, महिला एवं बाल विकास मंत्री, छत्तीसगढ़

राज्य सरकार का मानना है कि यह पौधारोपण न केवल पर्यावरण को बचाएगा, बल्कि एक सुपोषित और स्वस्थ छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव भी रखेगा।

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