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₹26 करोड़ का ओवरब्रिज पहली ही बारिश में ‘लाचार’: PM गति शक्ति योजना के काम पर उठे सवाल, विस अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने रेल मंत्री को लिखी चिट्ठी

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राजनांदगांव 11 जुलाई । विकास की ‘गति’ को तेज करने के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना’ के तहत बना एक ओवरब्रिज पहली ही मानसूनी बारिश का थपेड़ा भी नहीं झेल सका। राजनांदगांव और डोंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र को जोड़ने के लिए ₹26 करोड़ से अधिक की भारी-भरकम लागत से तैयार किए गए इस नवनिर्मित ओवरब्रिज में पहली ही बारिश (4-5 जुलाई) के बाद भयानक दरारें आ गई हैं।

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अभी इस ब्रिज के लोकार्पण की गूंज शांत भी नहीं हुई थी कि भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण की पोल खुलकर सामने आ गई है। इस घटना के बाद से स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है और निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

60 से 70 फीट लंबी दरारें: भ्रष्टाचार की गवाही देती तस्वीरें

स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहली ही मानसूनी फुहारों ने चमचमाती सड़क के नीचे छिपे सच को उजागर कर दिया। ओवरब्रिज पर 60 से 70 फीट लंबी और लगभग 15-20 सेंटीमीटर चौड़ी गहरी दरारें आ गई हैं। इन दरारों को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों की किस कदर अनदेखी की गई है। जनता का कहना है कि ₹26 करोड़ की लागत से बना यह ढांचा पहली ही बारिश में ढहने की कगार पर पहुंच गया है, जो सीधे तौर पर जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी है।

बैकफुट पर जनप्रतिनिधि: विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने मोर्चा संभाला

इस तकनीकी विफलता और जनता के गुस्से का असर अब राजनीतिक गलियारों में भी दिखने लगा है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री, वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष और स्थानीय विधायक डॉ. रमन सिंह ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। अपनी राजनीतिक साख पर आँच आते देख उन्होंने सीधे देश के रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को एक कड़ा पत्र लिखा है।

डॉ. रमन सिंह ने पत्र में अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इस तरह के घटिया निर्माण से जनता के बीच जनप्रतिनिधियों की छवि धूमिल होती है और उन्हें जनता की ‘नकारात्मक प्रतिक्रिया’ यानी तीखे आक्रोश का सामना करना पड़ता है।

‘उच्च स्तरीय जांच’ की मांग: नपेंगे ठेकेदार और कंसलटेंट

विधानसभा अध्यक्ष ने रेल मंत्री से मांग की है कि इस पूरे प्रोजेक्ट की एक उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच (High-Level Inquiry) कराई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया है कि:

  • पुल का निर्माण करने वाली एजेंसी और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

  • तकनीकी देखरेख करने वाले कंसलटेंट और लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

  • दोषी पाए जाने पर संबंधित ब्लैकलिस्टेड किया जाए और नुकसान की भरपाई की जाए।

जनता का सवाल: “जिस योजना का नाम ‘गति शक्ति’ है, क्या उसमें भ्रष्टाचार की गति को शक्ति दी जा रही है? ₹26 करोड़ का बजट पहली ही बारिश में पानी में बहने के लिए जिम्मेदार चेहरों को कब बेनकाब किया जाएगा?”

अब देखना यह है कि रेल मंत्रालय इस पर कितनी जल्दी एक्शन लेता है और दोषियों पर गाज कब गिरती है।

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