कोरबा 9 जुलाई । जिला कृषि विभाग ने उरगा के सिलियरी भाटा स्थित एक गोदाम पर छापेमारी कर 100 बोरी (करीब 4.5 टन) आईपीएल यूरिया जब्त किया है। विभाग ने इसे अपनी एक बड़ी कामयाबी बताया है, लेकिन इस कार्रवाई ने खुद कृषि विभाग की नियमित निगरानी और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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मुख्य बिंदु:
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अवैध भंडारण पर कार्रवाई: कृषि विभाग को सूचना मिली थी कि उरगा के एक गोदाम में भारी मात्रा में खाद रखी हुई है। टीम ने जब वहां छापा मारा, तो 100 बोरी यूरिया बरामद हुआ।
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दस्तावेज पेश करने में नाकाम: जांच के दौरान संबंधित खाद विक्रेता से जब यूरिया की खरीद-बिक्री के बिल और अन्य वैध दस्तावेज मांगे गए, तो वह कोई भी कागजात पेश नहीं कर सका। इसके बाद विभाग ने यूरिया का सैंपल लिया और पूरी खेप को जब्त कर लिया।
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निगरानी व्यवस्था पर सवाल: इस कार्रवाई के बाद आम लोगों और किसानों के बीच यह चर्चा तेज है कि जब उर्वरकों की बिक्री और भंडारण की जिम्मेदारी विभाग की होती है, तो इतना बड़ा स्टॉक अधिकारियों की नजरों से कैसे बचा रहा? क्या यह भंडारण हाल ही में हुआ था या काफी समय से चल रहा था?
किसानों की चिंता और कालाबाजारी की आशंका:
स्थानीय किसानों का कहना है कि खेती के सीजन में हमेशा खाद की किल्लत बनी रहती है। ऐसे में किसी निजी गोदाम में इतनी बड़ी मात्रा में यूरिया मिलना सीधे तौर पर कालाबाजारी (ब्लैक मार्केटिंग) की ओर इशारा करता है। किसानों ने मांग की है कि केवल खाद जब्त करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इस पूरे नेटवर्क और इसके पीछे छिपे सिंडिकेट का पर्दाफाश होना चाहिए।
आगे की कार्रवाई:
फिलहाल कृषि विभाग ने जब्त किए गए यूरिया को अग्रिम कानूनी कार्रवाई तक अपनी सुपुर्दगी में ले लिया है और मामले की जांच जारी रखने की बात कही है। अब देखना यह होगा कि विभाग सिर्फ छोटे व्यापारियों पर कार्रवाई करके मामला रफा-दफा करता है या अपनी ढीली निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा करता है।
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