मैड्रिड/लिस्बन: मैदान पर सन्नाटा था। घड़ी की सुइयां थम चुकी थीं और रेफरी की आखिरी सीटी के साथ ही करोड़ों दिलों की धड़कनें भी रुक गईं। पुर्तगाल के फैंस की आंखों में अविश्वास था और मैदान के बीचों-बीच खड़ा वह ‘नंबर 7’ का जादूगर आसमान की तरफ देख रहा था। स्पेन के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल में मिली 1-0 की उस दर्दनाक हार ने सिर्फ एक मैच का फैसला नहीं किया, बल्कि फुटबॉल के इतिहास के सबसे सुनहरे और जादुई अध्याय पर हमेशा के लिए पूर्णविराम लगा दिया।

जी हां, 41 साल की उम्र में क्रिस्टियानो रोनाल्डो का फीफा विश्व कप जीतने का वो अधूरा ख्वाब, अब हमेशा के लिए एक अधूरी दास्तान बनकर रह गया है। मैच के बाद खुद रोनाल्डो ने भारी मन से इस बात की पुष्टि कर दी कि अब वे कभी विश्व कप के मंच पर पुर्तगाल की जर्सी में नजर नहीं आएंगे।
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अधूरा रह गया वो एक ख्वाब, लेकिन इतिहास हमेशा गवाही देगा

कहते हैं कि किस्मत हर महान खिलाड़ी को मुकम्मल विदाई नहीं देती। रोनाल्डो का विश्व कप ट्रॉफी को चूमने का सपना भले ही अधूरा रह गया हो, लेकिन उन्होंने फुटबॉल की बिसात पर जो लकीर खींच दी है, उसे मिटाना नामुमकिन है।
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27 मैचों का महासंग्राम: रोनाल्डो ने अपने करियर में रिकॉर्ड 27 विश्व कप मैच खेले। इतिहास में उनसे आगे सिर्फ अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी (30 मैच) हैं।
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6 विश्व कप में गोल का अनोखा कीर्तिमान: वह दुनिया के इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने 6 अलग-अलग विश्व कप में गोल दागने का कारनामा किया है। इस आखिरी विश्व कप में भी उन्होंने 3 शानदार गोल करके अपने जज्बे का लोहा मनवाया।
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11 गोल का महाकीर्तिमान: विश्व कप के इतिहास में उनके नाम कुल 11 गोल दर्ज हैं, जो उन्हें टूर्नामेंट के सर्वकालिक महान स्कोरर्स की सूची में संयुक्त रूप से नौवें स्थान पर रखता है।
“2006 में पहली बार विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचने का वो रोमांच हो, या इस आखिरी मैच की बेबसी… रोनाल्डो ने हमेशा पुर्तगाल के लिए अपना खून-पसीना एक किया।”
‘2016 का यूरो कप ही मेरा विश्व कप है’

भले ही फीफा ट्रॉफी उनके हाथों में नहीं सजी, लेकिन रोनाल्डो ने पुर्तगाल को जो दिया, वो किसी चमत्कार से कम नहीं था। उन्होंने अपनी कप्तानी और खेल के दम पर पुर्तगाल को 2016 का ऐतिहासिक यूरो कप और दो UEFA नेशंस लीग के खिताब जिताए।
भावुक रोनाल्डो ने हार के बाद कहा:
“विश्व कप से इस तरह बाहर होना बेहद दर्दनाक है। लेकिन मेरी अंतरात्मा पूरी तरह साफ है, क्योंकि मैंने मैदान पर अपना 100 फीसदी दिया। मैंने अपना सब कुछ झोंक दिया। शायद यही एक खिलाड़ी की जिंदगी है—आगे बढ़ना पड़ता है। मेरे लिए 2016 का यूरो कप जीतना, विश्व कप जीतने के ही बराबर है।”
कोच मार्टिनेज ने कहा- ‘वह सिर्फ खिलाड़ी नहीं, प्रेरणा हैं’
पुर्तगाल के मुख्य कोच रॉबर्टो मार्टिनेज भी इस विदाई पर अपने आंसू नहीं रोक पाए। रोनाल्डो को पूरे 90 मिनट मैदान पर रखने के अपने फैसले का बचाव करते हुए उन्होंने कहा:
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“जब आपकी टीम को गोल की सख्त जरूरत हो, तो आप अपने सबसे बड़े मैच-विजेता और गोल स्कोरर को बेंच पर नहीं बैठा सकते। रोनाल्डो को मैदान पर बनाए रखने का फैसला बिल्कुल सही था।”
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“क्रिस्टियानो सिर्फ गोल करने वाली मशीन नहीं हैं। वह पूरी टीम की आत्मा हैं, एक प्रेरणा हैं। मैदान पर उनका समर्पण, उनकी लीडरशिप और फुटबॉल के लिए उनका वो कभी न खत्म होने वाला जुनून आने वाली कई पीढ़ियों के लिए एक मिसाल रहेगा।”
विदा ‘CR7’ ! रिकॉर्ड्स तो मिट सकते हैं, लेकिन यह मोहब्बत नहीं…
स्पेन के खिलाफ उस 1-0 की हार के साथ फुटबॉल के सबसे बड़े मंच से रोनाल्डो की विदाई भले ही आंसुओं के साथ हुई हो, लेकिन खेल के इतिहास में उनका नाम सबसे ऊपर, सबसे चमकदार अक्षरों में लिखा जाएगा। रोनाल्डो सिर्फ एक खिलाड़ी के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे योद्धा के रूप में याद किए जाएंगे जिसने आखिरी मिनट तक, आखिरी सांस तक लड़ना नहीं छोड़ा।
शुक्रिया क्रिस्टियानो रोनाल्डो, हमें फुटबॉल से इस कदर मोहब्बत करना सिखाने के लिए!
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