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मोदी कैबिनेट में महाफेरबदल की सुगबुगाहट: यूपी 2027 के लिए ‘रामबाण’ बनेंगे अरुण गोविल? शक्तिकांत दास की भी एंट्री संभव!

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नई दिल्ली, 27 जून। मोदी मंत्रिपरिषद में बहुप्रतीक्षित फेरबदल और विस्तार की अटकलें अब अपने चरम पर हैं। गुरुवार 25 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हुई औचक मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज है। माना जा रहा है कि अगले सप्ताह मोदी कैबिनेट का नया स्वरूप सामने आ सकता है।

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इस संभावित फेरबदल में दो नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है— मेरठ से बीजेपी सांसद अरुण गोविल और पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास

अयोध्या चंदा चोरी विवाद: यूपी चुनाव से पहले बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती

उत्तर प्रदेश की राजनीति इस समय राम मंदिर के दान-चढ़ावे में हुई चोरी के आरोपों से गरमाई हुई है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर एसआईटी (SIT) जांच के बाद एफआईआर दर्ज हो चुकी है और पुलिस ने चंपत राय के पूर्व ड्राइवर सहित 8 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। अब तक करीब 79.80 लाख रुपये बरामद भी किए जा चुके हैं।

इस्तीफों का दौर: विपक्ष के भारी दबाव और एसआईटी जांच की आंच के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हैं और इसे 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के लिए बड़ा हथियार बना रहे हैं।

‘प्रभु राम’ की एंट्री: डैमेज कंट्रोल या बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक?

चंदा चोरी विवाद से रामभक्तों के बीच जा रहे गलत संदेश को रोकने के लिए बीजेपी को यूपी में एक बेदाग और असरदार चेहरे की जरूरत है। टीवी सीरियल ‘रामायण’ में भगवान राम का किरदार निभाकर घर-घर पूजे जाने वाले अरुण गोविल को कैबिनेट में शामिल करने की चर्चा को इसी ‘डैमेज कंट्रोल’ से जोड़कर देखा जा रहा है।

  • सटीक नैरेटिव: गोविल की साफ-सुथरी और ‘प्रभु राम’ वाली छवि के जरिए बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि राम के काम में धांधली करने वालों का हिसाब खुद ‘राम’ के प्रतिनिधि करेंगे।

  • सपा-कांग्रेस की घेराबंदी: विपक्ष के लिए अरुण गोविल पर सीधा या निजी हमला करना बेहद मुश्किल होगा, क्योंकि इससे बहुसंख्यक समाज की धार्मिक भावनाएं आहत होने का डर रहेगा।

पश्चिमी यूपी से अवध तक का सियासी समीकरण

मेरठ से सांसद अरुण गोविल को मंत्री बनाकर बीजेपी एक तीर से दो निशाने साधेगी:

  1. अवध क्षेत्र (अयोध्या): रामभक्तों के आक्रोश पर मरहम लगेगा।

  2. पश्चिमी यूपी: पिछले चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने जो सेंधमारी की थी, उसकी भरपाई गोविल जैसा सर्वमान्य हिंदुत्ववादी चेहरा कर सकता है।

शक्तिकांत दास और अन्य बड़े सांगठनिक बदलाव

अरुण गोविल के अलावा इस फेरबदल में पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास का नाम भी रेस में सबसे आगे है। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें कैबिनेट में शामिल कर कोई बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी दी जा सकती है, जो सरकार की आर्थिक नीतियों को नई रफ्तार देने का संकेत है।

फेरबदल क्यों है जरूरी?

  • जॉर्ज कुरियन ने हाल ही में मंत्री पद से इस्तीफा दिया है।

  • रवनीत सिंह बिट्टू का उच्च सदन (राज्यसभा) का कार्यकाल समाप्त हो चुका है।

  • कई मौजूदा मंत्रियों को उनके राज्यों में संगठन की कमान सौंपी जानी है।

कुल मिलाकर, मोदी कैबिनेट का यह आगामी विस्तार केवल विभागों का बंटवारा नहीं, बल्कि यूपी चुनाव 2027 को फतह करने के लिए बीजेपी का अचूक चक्रव्यूह नजर आ रहा है।

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