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नकली दवाओं का खेल खत्म! सरकार का बड़ा फैसला: कैंसर, एंटीबायोटिक और टीकों पर अब अनिवार्य होगा QR Code

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QR Code On Medicines नई दिल्ली, 27 जून। : बाजार में बिकने वाली नकली और घटिया दवाएं अब मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं कर पाएंगी। केंद्र सरकार ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज)अब कैंसर, मानसिक रोग, टीकों और एंटीबायोटिक दवाओं के पैकेट पर QR कोड या बारकोड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।

इस नई व्यवस्था के बाद, कोई भी मरीज या डॉक्टर सिर्फ अपने मोबाइल से स्कैन करके दवा के असली या नकली होने का पता तुरंत लगा सकेगा।

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आखिर सरकार को क्यों उठाना पड़ा यह कदम?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने औषधि नियमावली (Drugs Rules), 1945 में बड़ा संशोधन करते हुए कई संवेदनशील दवाओं को अनुसूची H2 (Schedule H2) में शामिल किया है।

  • पहले का नियम: यह व्यवस्था पहले केवल देश के 300 बड़े ब्रांड्स तक ही सीमित थी।

  • अब क्या बदलेगा: अब गंभीर और संवेदनशील बीमारियों की दवाओं को भी इसके दायरे में लाया गया है ताकि मैन्युफैक्चरिंग से लेकर मरीज तक पहुँचने तक हर दवा की ‘लाइव ट्रैकिंग’ हो सके।

स्कैन करते ही मोबाइल पर दिखेगी दवा की ‘कुंडली’

दवा के पैकेट पर मौजूद QR कोड को स्कैन करते ही आपके स्क्रीन पर ये महत्वपूर्ण जानकारियां आ जाएंगी:

  • दवा का ब्रांड और जेनेरिक (साधारण) नाम।

  • दवा निर्माता कंपनी का नाम और उसका पूरा पता।

  • बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट।

  • मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस नंबर।

  • यूनिक प्रोडक्ट आइडेंटिफिकेशन कोड।

छोटे पैक के लिए भी नियम सख्त: अगर दवा का पत्ता (स्ट्रिप) या शीशी बहुत छोटी है, तो कंपनी को दवा के बाहरी डिब्बे (कार्टन) पर यह QR कोड छापना ही होगा। बिना QR कोड के इन दवाओं को बेचना गैर-कानूनी माना जाएगा।(आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज)

दो चरणों में लागू होगी नई व्यवस्था: नोट कर लें तारीखें

सरकार ने दवा कंपनियों को इस तकनीकी बदलाव को अपनाने के लिए दो चरणों में समय दिया है:

चरण लागू होने की तारीख कौन सी दवाएं शामिल होंगी?
पहला चरण 1 जुलाई 2026 से सभी प्रकार के टीके (Vaccines), कैंसर के इलाज की दवाएं और मानसिक रोग (जैसे डिप्रेशन) की दवाएं।
दूसरा चरण 1 जुलाई 2028 से सभी प्रकार की एंटीबायोटिक (सूक्ष्मजीव रोधी) दवाएं।
निष्कर्ष

सरकार के इस फैसले से न सिर्फ नकली दवाओं के काले कारोबार पर लगाम लगेगी, बल्कि मरीजों का देश की स्वास्थ्य प्रणाली पर भरोसा और मजबूत होगा। अब हर नागरिक के हाथ में अपनी सुरक्षा की चाबी होगी।

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