Latest News
नकली दवाओं का खेल खत्म! सरकार का बड़ा फैसला: कैंसर, एंटीबायोटिक और टीकों पर अब अनिवार्य होगा QR Code ‘घी के मालपुए’ न परोसने पर 43 परिवारों का हुक्का-पानी बंद; सिरोही में पंचों का तुगलकी फरमान Health Alert: सावधान! ऑफिस में लगातार बैठकर काम करना सेहत के लिए ‘साइलेंट किलर’, जानिए बचने के आसान तरीके ## छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के 2 साल बेमिसाल: 28 जून को बिलासपुर में सजेगा ‘सराफा महासम्मेलन’ का भव्य मंच छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) की तैयारी: सरकार ने गठित की 5 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति, जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई बनीं अध्यक्ष विकास की वेदी पर बलि चढ़ते जंगल: 3 साल में 28 लाख से अधिक पेड़ काटने को मिली मंजूरी
Home » Uncategorized » ‘घी के मालपुए’ न परोसने पर 43 परिवारों का हुक्का-पानी बंद; सिरोही में पंचों का तुगलकी फरमान

‘घी के मालपुए’ न परोसने पर 43 परिवारों का हुक्का-पानी बंद; सिरोही में पंचों का तुगलकी फरमान

Share:

सिरोही 27 जून : राजस्थान के सिरोही जिले के मांडवरिया गांव (बारलूट थाना क्षेत्र) से सामाजिक कुप्रथा और संवेदनहीनता का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां अंतिम संस्कार के मृत्युभोज (नुक्ता) में घी के पारंपरिक मालपुए नहीं परोसने पर एक गरीब परिवार सहित उनका समर्थन करने वाले 43 परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है।

Advt

आर्थिक तंगी बनी ‘गुनाह’, पंचों ने सुनाया फरमान

घटनाक्रम के अनुसार, गांव के एक आर्थिक रूप से बेहद कमजोर परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु हो गई थी। गरीबी के कारण यह परिवार मृत्युभोज में बिरादरी की परंपरा के अनुसार महंगे “घी-मालपुए” का इंतजाम नहीं कर सका और उसने सादा खाना परोस दिया।

इस बात से नाराज होकर बिरादरी के करीब एक दर्जन से ज्यादा पंचों (बुजुर्गों) ने 18 जून को शोक संतप्त परिवार को समाज से बाहर करने का फरमान सुना दिया। जब गांव के अन्य 42 परिवार इस गरीब परिवार के समर्थन में उतरे, तो पंचों ने उन्हें भी सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर दिया।

राशन, पानी और मजदूरी पर लगी रोक

बहिष्कार झेल रहे परिवारों की जिंदगी अब नरक जैसी हो गई है। पीड़ितों ने निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए हैं:

  • राशन-पानी बंद: स्थानीय दुकानदारों ने इन परिवारों को राशन देने से मना कर दिया है।

  • कुएं से पानी भरने पर रोक: गांव के सार्वजनिक कुएं से इन्हें पीने का पानी नहीं लेने दिया जा रहा है।

  • रोजी-रोटी पर संकट: खेत मालिकों ने इन परिवारों के लोगों को मजदूरी पर रखने से साफ इनकार कर दिया है।

  • शादी-ब्याह में जाने पर पाबंदी: पीड़ित गोपाल ने बताया कि समाज के डर और पाबंदियों के कारण वे 20 जून को अपने सगे रिश्तेदार की शादी में भी शामिल नहीं हो सके।

₹11,000 जुर्माने का खौफ

पंचों ने गांव में यह मुनादी करवा दी है कि यदि किसी ने भी इन 43 परिवारों से किसी भी तरह का संबंध रखा, बातचीत की या इनकी मदद की, तो उस पर 11,000 रुपये का नकद जुर्माना लगाया जाएगा और पूरे समाज को दावत देनी होगी।

पुलिसिया कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

पीड़ित परिवारों ने इस प्रताड़ना के खिलाफ 20 जून को ही बारलूट थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस इस पर ढुलमुल रवैया अपना रही है।

इस मामले पर बारलूट पुलिस स्टेशन के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) रमेश कुमार का कहना है:

“हमें शिकायत मिली है और मामले की जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया यह मामला किसी पुराने विवाद से जुड़ा हुआ लग रहा है। शुरुआती जांच पूरी होते ही एफआईआर (FIR) दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

📍

Leave a Comment