जगदलपुर/कोरबा 28 अप्रैल 2026: कभी बारूद के धुएं और नक्सली दहशत के लिए पहचाना जाने वाला बस्तर अब विकास और विश्वास की नई इबारत लिख रहा है। प्रदेश के उद्योग एवं श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन की विशेष पहल पर कोरबा की महिला पत्रकारों की टीम ने बस्तर का दौरा कर वहां की बदलती सामाजिक और सुरक्षा स्थिति का बारीकी से अध्ययन किया। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

आईजी सुंदरराज पी से खास मुलाकात: रणनीति और विश्वास की जीत
बस्तर प्रवास के दौरान महिला पत्रकारों की टीम ने बस्तर आईजी सुंदरराज पी से मुलाकात की। आईजी ने बताया कि बस्तर में शांति बहाली केवल हथियारों के दम पर नहीं, बल्कि ग्रामीणों का भरोसा जीतकर संभव हुई है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
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चुनौतीपूर्ण अभियान: गढ़चिरौली जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने सुनियोजित तरीके से नक्सलियों के पैर उखाड़े हैं।
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बदलाव की सोच: आईजी के अनुसार, अब बड़ी संख्या में नक्सली संगठन का साथ छोड़कर लोकतंत्र और संविधान पर भरोसा जताते हुए मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
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मैदान के वीरों के अनुभव: डीएसपी दीपमाला और एसडीओपी राहुल उइके

यात्रा के दौरान डीएसपी दीपमाला ने टीम को उन पूर्व नक्सलियों से मिलवाया, जो अब बंदूक छोड़कर सामान्य नागरिक की तरह जीवन जी रहे हैं। वहीं दंतेवाड़ा में एसडीओपी राहुल कुमार उइके ने कई रोमांचक मुठभेड़ों और बचाव अभियानों के अनुभव साझा किए। /आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज/ इन जांबाज अफसरों की बातें सुनकर टीम के सदस्य भावुक हो उठे। दंतेवाड़ा में स्थानीय वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन पांडेय ने भी क्षेत्र में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी दी।
बंदूक छोड़ प्रमिला ने थामी रसोई की कमान

रिपोर्टिंग के दौरान सबसे मर्मस्पर्शी दृश्य जगदलपुर के ‘पंडुम रेस्टोरेंट’ में दिखा। वहां काम करने वाली प्रमिला कभी हाथ में एके-47 लेकर जंगलों में भटकती थी। आज वही प्रमिला चूल्हे की आंच पर स्वादिष्ट व्यंजन तैयार कर रही है। / आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज/ प्रमिला के साथ आसमाती, फूलमती और फगनी पोयाम जैसी महिलाएं अब आत्मसम्मान के साथ स्वावलंबन की राह पर हैं।

बदलते बस्तर के मुख्य स्तंभ:
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दहशत का अंत: बाजारों में लौटती रौनक और सुरक्षित सड़कें।
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विकास पर भरोसा: ग्रामीणों का प्रशासन और सुरक्षा बलों के प्रति बढ़ता सकारात्मक नजरिया।
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सशक्त नारी शक्ति: आत्मसमर्पित महिलाओं का आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना।
निष्कर्ष: कोरबा की महिला पत्रकारों की यह यात्रा प्रमाणित करती है कि बस्तर अब संघर्ष की बेड़ियों को तोड़कर शांति, विकास और विश्वास के नए युग में प्रवेश कर चुका है।
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