चर्चा में लायंस क्लब की भूमिका
कोरबा 24 अप्रैल 2026 । प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार नारी सशक्तिकरण और महिला सम्मान को सर्वोपरि रख रही है, वहीं कोरबा नगर निगम के कुछ अधिकारियों की कार्यशैली सरकार की इस मंशा पर पानी फेरती नजर आ रही है। पावर हाउस रोड पर हाल ही में स्वच्छता जागरूकता अभियान के तहत कार्रवाई ने न केवल प्रशासनिक मर्यादाओं को लांघा, बल्कि महिला सम्मान को भी दांव पर लगा दिया है।
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सरकारी मिशन बनाम स्थानीय कुप्रबंधन
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय लगातार प्रदेश में कानून व्यवस्था और महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने की दिशा में सराहनीय कार्य कर रहे हैं। लेकिन कोरबा नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी की अगुवाई में हुई कार्रवाई ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या स्थानीय अधिकारी सरकारी सुरक्षा प्रोटोकॉल और मर्यादाओं को भूल चुके हैं? शहर के व्यस्ततम इलाके में हुई इस कार्रवाई ने सरकारी कार्यप्रणाली की गोपनीयता पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
भीड़ के जरिए कार्रवाई: क्या यह ‘आउटसोर्सिंग’ है?
अमूमन सरकारी छापामार कार्रवाई में केवल संबंधित विभाग के वर्दीधारी या आधिकारिक कर्मचारी ही शामिल होते हैं। लेकिन पावर हाउस रोड की इस घटना के वीडियो साक्ष्य बताते हैं कि दुकान के भीतर अधिकारियों के साथ कई ‘अपरिचित’ चेहरे भी मौजूद थे। सवाल यह उठता है कि क्या नगर निगम स्वच्छता जागरूकता अभियान के तहत बाजार में निकला था या छापामार कार्रवाई करने जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी का ‘आउटसोर्सिंग’ कर दिया है? गैर-सरकारी लोगों की इस मौजूदगी ने प्रशासन की विश्वसनीयता को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
कानून ताक पर: महिला की मर्यादा से खिलवाड़
घटना के वक्त दुकान में एक महिला अकेली मौजूद थी। नियम स्पष्ट है कि यदि कार्रवाई का सामना करने वाला पक्ष महिला हो, तो वहां महिला पुलिस बल या महिला अधिकारी की मौजूदगी अनिवार्य है। लेकिन यहाँ नियमों को ताक पर रखकर पुरुषों की भारी भीड़ ने महिला को घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उस समय वहां भय का माहौल बन गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि यह न केवल प्रशासनिक चूक है, बल्कि महिला की गरिमा का भी खुला उल्लंघन है।
लायंस क्लब की भूमिका पर गहराता विवाद
इस पूरी कार्रवाई में लायंस क्लब जैसे सामाजिक संगठन के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी सबसे अधिक चर्चा का विषय बनी हुई है। समाज सेवा के लिए पहचाने जाने वाले संगठन का किसी प्रशासनिक जब्ती या जांच में शामिल होना समझ से परे है। नागरिक पूछ रहे हैं कि क्या अब नगर निगम की कार्रवाई सामाजिक संगठनों के ‘मार्गदर्शन’ में होगी? और यदि उस भीड़भाड़ में कोई अप्रिय स्थिति निर्मित होती, तो उसका जवाबदेह कौन होता?
जनता मांगे जवाब: किसकी शह पर हुआ यह सब?
नगर निगम की इस ‘संयुक्त’ और विवादित कार्रवाई ने कई अनसुलझे सवाल छोड़ दिए हैं। शहर के प्रबुद्ध नागरिक अब उच्च अधिकारियों से जवाब मांग रहे हैं कि क्या इन बाहरी लोगों की मौजूदगी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है? मुख्यमंत्री के नारी सशक्तिकरण के संकल्प के बीच कोरबा के इस ‘छापामार कांड’ ने प्रशासन की छवि को गहरा धक्का पहुँचाया है।








