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बिलासपुर: वर्दी शर्मसार! पैसे लेकर फरियादी पर बरसाए ’15-20 थप्पड़’, वीडियो वायरल होने के बाद ASI सस्पेंड

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बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 19 अप्रैल : न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंचे एक फरियादी के साथ जो हुआ, उसने पुलिसिया तंत्र और वर्दी की मर्यादा पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। रतनपुर थाना परिसर के भीतर एक एएसआई द्वारा फरियादी के साथ सरेआम मारपीट और गाली-गलौज का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

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क्या है पूरा मामला?

पीड़ित विनोद जायसवाल पिछले कई दिनों से अपने एक परिवाद (शिकायत) की जांच रिपोर्ट के लिए रतनपुर थाने के चक्कर काट रहे थे। आरोप है कि मामले की जांच कर रहे एएसआई दिनेश तिवारी ने रिपोर्ट तैयार करने के एवज में पीड़ित से पैसों की मांग की और पैसे ले भी लिए।

विवाद तब शुरू हुआ जब पीड़ित ने काम में देरी होने पर एएसआई से सवाल किया— “पैसे लेने के बाद भी काम क्यों नहीं हुआ?” यह सुनते ही एएसआई आगबबूला हो गए और थाने के भीतर ही फरियादी पर थप्पड़ों की बरसात कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एएसआई ने एक के बाद एक लगभग 15 से 20 थप्पड़ जड़े।

IPS अंशिका जैन ने किया हस्तक्षेप

थाने के भीतर मचे इस शोर-शराबे को सुनकर थाना प्रभारी और प्रशिक्षु आईपीएस अंशिका जैन तुरंत मौके पर पहुंचीं। उन्होंने स्थिति को संभालते हुए आरोपी एएसआई को जमकर फटकार लगाई और पीड़ित को राहत पहुंचाई।

अब तक की कार्रवाई

घटना की गंभीरता और सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो को संज्ञान में लेते हुए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है:

  • सस्पेंशन: पुलिस कप्तान ने आरोपी एएसआई दिनेश तिवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

  • FIR दर्ज: पीड़ित की शिकायत के आधार पर एएसआई के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है।

  • विभागीय जांच: वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रजनेश सिंह इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। माना जा रहा है कि यदि भ्रष्टाचार और मारपीट के आरोप विभागीय जांच में पुख्ता होते हैं, तो एएसआई पर और भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

सिस्टम पर उठते सवाल

इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि क्या केवल ‘सस्पेंशन’ ही काफी है? भ्रष्टाचार और सरेआम हिंसा करने वाले अधिकारी के खिलाफ क्या ऐसी उदाहरणात्मक कार्रवाई होगी जो भविष्य में किसी भी खाकी वर्दी वाले को कानून हाथ में लेने से पहले सोचने पर मजबूर कर दे?

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