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‘छोटा’ कपड़ा, ‘बड़ी’ राजनीति: छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की साड़ी बनी चर्चा का केंद्र!

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रायपुर 10 अप्रैल 2026 : छत्तीसगढ़ के सरकारी गलियारों में इन दिनों ‘साड़ी’ की चर्चा जोरों पर है। मामला फैशन का नहीं, बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बांटी गई उस ‘यूनिफॉर्म’ का है, जिसने वितरण के साथ ही विवादों का रंग पकड़ लिया है। विभाग ने तो 1.94 लाख साड़ियां इस उम्मीद में बांटी थीं कि सिस्टम की तस्वीर सुधरेगी, पर यहाँ तो साड़ी की ‘लंबाई’ और ‘क्वालिटी’ ही सिस्टम की पोल खोलने लगी है।

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मामले के ‘कड़वे’ सच:

  • लंबाई में ‘शॉर्टकट’: सरकारी मापदंड के अनुसार साड़ी ब्लाउज पीस सहित 6.30 मीटर की होनी चाहिए थी। लेकिन जब कार्यकर्ताओं ने इसे आजमाया, तो पता चला कि सरकार ने लंबाई में भी ‘कंजूसी’ कर दी है। अब सवाल यह है कि कार्यकर्ता काम पर ध्यान दें या साड़ी संभालने पर?

  • धुलते ही उतरा ‘सरकारी’ रंग: दुर्ग, धमतरी और रायगढ़ जैसे जिलों से खबरें आ रही हैं कि पहली धुलाई में ही साड़ी अपना असली रंग छोड़ रही है। शायद सप्लाई करने वाली एजेंसी ने सोचा होगा कि कार्यकर्ता हर दिन एक नया ‘शेड’ पहनें, पर कार्यकर्ताओं के लिए यह गुणवत्ता के साथ भद्दा मजाक साबित हो रहा है।

  • मुंबई से ‘पास’, धरातल पर ‘फेल’: विभाग का दावा है कि मुंबई की बड़ी एजेंसी ‘राइट्स लिमिटेड’ ने क्वालिटी चेक की थी। अब साहब, मुंबई के एयर-कंडीशंड कमरों में पास हुई साड़ी छत्तीसगढ़ के गांवों की धूल और पसीने में ‘तार-तार’ हो रही है, तो जवाबदेही किसकी?

  • बजट का ‘गणित’: प्रति साड़ी 500 रुपये का बजट तय था। करोड़ों के इस ऑर्डर में अगर धागे निकलने लगें और बुनाई में छेद दिखने लगें, तो ‘पारदर्शिता’ के दावों पर सवाल उठना लाजिमी है।

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विभागीय स्पष्टीकरण: “साड़ी बदलेगी, नुकसान नहीं होने देंगे”

मामले ने जब तूल पकड़ा और शिकायतें सचिवालय तक पहुंचीं, तो महिला एवं बाल विकास विभाग ने अपना पक्ष रखते हुए स्थिति स्पष्ट की है:

विभाग का कहना है कि: > 1. शर्तों का पालन: साड़ी सप्लाई के कार्यादेश (Work Order) में पहले ही यह शर्त शामिल थी कि गुणवत्ता खराब होने या शिकायत मिलने पर एजेंसी को सामग्री बदलनी होगी। 2. सुधार प्रक्रिया: जिन जिलों (दुर्ग, धमतरी, रायगढ़ और कबीरधाम) से शिकायतें मिली हैं, वहां जांच समिति भेज दी गई है। जहां भी मापदंड कम पाए गए हैं, वहां खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से साड़ियां बदली जा रही हैं। 3. हितों की रक्षा: विभाग ने आश्वस्त किया है कि किसी भी हितग्राही (कार्यकर्ता/सहायिका) को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा और सभी को मानक के अनुरूप नई साड़ियां उपलब्ध कराई जाएंगी।


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