Latest News
भारत की थाली का सच: क्या भारत केवल शाकाहारी देश है? BRICS डिनर, राहुल गांधी का दावा और भारतीय खान-पान का इतिहास कैल्शियम स्कोर सही, तो भी दिल की बीमारी का खतरा? जानिए क्या कहती है 10 साल की यह नई रिसर्च कोरबा में आसमान में दिखा अद्भुत नजारा: अर्धचंद्र के ऊपर चमका बेहद खूबसूरत तारा, जानें क्या है इसका खगोलीय सच बालको मेडिकल सेंटर के चौथे वार्षिक बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव में शामिल होंगे देश-दुनिया के कैंसर विशेषज्ञ गणेशोत्सव से पहले कोरबा पुलिस का बड़ा एक्शन: एक ही दिन में 105 अपराधियों पर कार्रवाई, 60 वारंटी भेजे गए जेल अंबिकापुर में छात्र नेता की प्रताड़ना से तंग आकर छात्रा ने की आत्महत्या, आरोपी गिरफ्तार; कांग्रेस ने पार्टी से किया निलंबित
Home » छत्तीसगढ़ » सपनों का जंगल: गेवरा के पथरीले डंप यार्ड में ‘हरित क्रांति’ की ओर बढ़ते कदम

सपनों का जंगल: गेवरा के पथरीले डंप यार्ड में ‘हरित क्रांति’ की ओर बढ़ते कदम

Share:

कोरबा/रायपुर 9 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ के औद्योगिक हृदयस्थल कोरबा में प्रकृति और विकास के बीच संतुलन की एक नई इबारत लिखी जा रही है। एसईसीएल गेवरा के उन पथरीले डंप क्षेत्रों में, जहाँ कभी केवल कोयले का मलबा और धूल का गुबार था, अब छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के प्रयासों से ‘सपनों का जंगल’ आकार ले रहा है। वैज्ञानिक पद्धति और निरंतर देखभाल के जरिए निगम ने 12.45 हेक्टेयर की बंजर भूमि को एक सघन हरित क्षेत्र में बदलने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा दिए हैं। वन मंत्री  केदार कश्यप ने इस दूरगामी पहल की सराहना करते हुए इसे भविष्य के पारिस्थितिक तंत्र के लिए एक संजीवनी करार दिया है।

Advt

मिश्रित प्रजातियों के पौधों का सफल रोपण कर बंजर भूमि को हरियाली में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया

जहां हरियाली संभव नहीं थी, वहां उगा जंगल

कोयला खनन के बाद डंप क्षेत्रों में उपजाऊ मिट्टी नीचे दब जाती है, जबकि ऊपर पत्थर, कोयला अवशेष और अनुपजाऊ मिट्टी रह जाती है। ऐसे क्षेत्र आमतौर पर बंजर हो जाते हैं और वहां पौधों का उगना बेहद कठिन होता है।
लेकिन वन विकास निगम के प्रयासों से यही बंजर भूमि अब धीरे-धीरे हरियाली से ढकती जा रही है।

वैज्ञानिक पद्धति से किया गया वृक्षारोपण

डंप क्षेत्र में जल स्तर कम होने और पोषक तत्वों की कमी को ध्यान में रखते हुए विशेष उपाय किए गए। वर्मी कम्पोस्ट, नीमखली और डीएपी का उपयोग कर मिट्टी को उर्वर बनाया गया, जीपीएस सर्वे और सीमांकन के बाद व्यवस्थित गड्ढे तैयार किए गए, 3–4 फीट ऊंचाई के स्वस्थ पौधों का चयन कर रोपण किया गया।

मिश्रित प्रजातियों से बढ़ेगी जैव विविधता

इस क्षेत्र में नीम, शीशम, सिरस, कचनार, करंज, आंवला, बांस, महोगनी, सहतूत, महुआ और बेल जैसी विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं।
इनसे आने वाले समय में यह क्षेत्र पक्षियों, गिलहरी और अन्य वन्य जीवों के लिए अनुकूल आवास बन सकेगा।

निरंतर देखभाल से मिल रही सफलता

रोपण के बाद पौधों की नियमित देखभाल की जा रही है, जिसमें सिंचाई, निंदाई- गुड़ाई,खाद डालना, सुरक्षा और घास कटाई मृत पौधों का समय पर प्रतिस्थापन जैसे कार्य शामिल हैं। वर्ष 2025 से 2029 तक 5 वर्षों तक रखरखाव के बाद इस विकसित हरित क्षेत्र को एसईसीएल गेवरा को सौंपा जाएगा।

प्रेरणादायक परिणाम

यह पहल दर्शाती है कि सही योजना, तकनीक और सतत प्रयासों से पत्थरीली व अनुपजाऊ भूमि को भी घने जंगल में बदला जा सकता हैl गेवरा का यह डंप क्षेत्र आने वाले वर्षों में एक सघन, हरित और जैव विविधता से भरपूर मानव-निर्मित जंगल के रूप में विकसित होगा, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरक पहल बन चुकी है।

।।।

Leave a Comment

latest news