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बर्फ नहीं, ‘लापरवाही की सिल्ली’ है यह: मेंढक निकलने पर डिपो संचालक बोले- “हमें क्या पता वह किसका है?”

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कोरबा छत्तीसगढ़ 4 अप्रैल 2026 । शहर के घंटाघर चौपाटी में लोग जूस का गिलास थामे ‘सुकून’ ढूंढ रहे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि बर्फ की सिल्ली के भीतर कोई और ही ‘मोक्ष’ प्राप्त कर चुका है। सोडा-गन्ना जूस के साथ मुफ्त में मिले ‘मृत मेंढक’ ने न केवल ग्राहकों का जी मिचला दिया, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के दावों की भी बर्फ जमा दी है।

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लापरवाही का ‘कोल्ड स्टोरेज’

शुक्रवार शाम जब दुकानदार ने जूस ठंडा करने के लिए बर्फ तोड़ी, तो अंदर से एक मरा हुआ मेंढक झांकता नजर आया। दृश्य ऐसा था कि जूस पीने आए शौकीनों की प्यास पल भर में गायब हो गई। यह मेंढक गलती से नहीं गिरा था, बल्कि बर्फ जमने की प्रक्रिया के दौरान ही ‘फ्रीज’ हो गया था। यानी फैक्ट्री में जब पानी भरा जा रहा था, तब भी किसी ने यह देखने की जहमत नहीं उठाई कि पानी में मछली तैर रही है या मेंढक!

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बयानबाजी का ‘ठंडा’ तमाशा

घटना के बाद जब हंगामे की आंच  बर्फ डिपो तक पहुंची, तो संचालक  ने जो जवाब दिया, वह किसी कॉमेडी फिल्म के डायलॉग से कम नहीं था। उन्होंने बड़े ही मासूमियत भरे लहजे में कहा— “हमें क्या पता वह बर्फ हमारी है या नहीं? और यह मेंढक कहां से आया, हमें जानकारी नहीं है।”

वाह! मतलब मेंढक ने शायद खुद ही डिसाइड किया होगा कि आज किसी गुमनाम बर्फ की सिल्ली में ‘समाधि’ लेनी है ताकि डिपो संचालक की जिम्मेदारी शून्य बनी रहे।

सिस्टम की ‘स्लो’ सर्विस

चौपाटी संघ के अध्यक्ष रवि वर्मा ने मौके पर पहुंचकर मेंढक को बाहर निकाला और नाराजगी जताई। वहीं, खाद्य-औषधि विभाग के अधिकारी विकास भगत ने ‘जांच’ का वही पुराना सरकारी मरहम लगाया है।

निष्कर्ष

कोरबा की जनता अब यह सोचकर डरी हुई है कि अगली बार जब वे किसी जूस की दुकान पर ‘एक्स्ट्रा आइस’ मांगेंगे, तो कहीं अंदर से मेंढक की जगह कोई और जलचर न निकल आए। बर्फ की ये सिल्लियां दरअसल जम चुकी लापरवाही का प्रतीक हैं, जिनका पिघलना फिलहाल मुश्किल ही लग रहा है।


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