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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: निजी घर में प्रार्थना के लिए अनुमति जरूरी नहीं

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बिलासपुर, 31 मार्च: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी व्यक्ति अपने निजी घर में शांतिपूर्वक प्रार्थना सभा आयोजित कर सकता है और इसके लिए प्रशासन से पूर्व अनुमति लेने की कोई कानूनी अनिवार्यता नहीं है। आप पड़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

मुख्य बिंदु:

  • नागरिक अधिकारों में दखल: कोर्ट ने पुलिस द्वारा जारी किए गए नोटिसों को रद्द करते हुए उन्हें नागरिक अधिकारों में अनावश्यक हस्तक्षेप करार दिया।

  • शांतिपूर्ण सभा पर रोक नहीं: न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि घर के भीतर होने वाली शांतिपूर्ण प्रार्थना पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है और केवल प्रार्थना के आधार पर किसी को परेशान नहीं किया जा सकता।

  • मामला क्या था? यह मामला जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ थाना क्षेत्र के गोधना गांव का है। यहाँ याचिकाकर्ता 2016 से अपने घर की पहली मंजिल पर प्रार्थना सभा आयोजित कर रहे थे, लेकिन पुलिस द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 94 के तहत बार-बार नोटिस जारी कर इसे रोकने की कोशिश की जा रही थी।

  • कोर्ट का रुख: हाईकोर्ट ने 18 अक्टूबर 2025, 22 नवंबर 2025 और 1 फरवरी 2026 को पुलिस द्वारा जारी सभी नोटिसों को निरस्त कर दिया है।

प्रशासन और पुलिस को निर्देश:

अदालत ने कहा कि यदि प्रार्थना सभा के दौरान शोर-शराबा, कानून-व्यवस्था की स्थिति या किसी नियम का उल्लंघन होता है, तो प्रशासन कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। हालांकि, कोर्ट ने पुलिस को सख्त निर्देश दिए कि वे जांच के नाम पर याचिकाकर्ताओं के नागरिक अधिकारों में हस्तक्षेप न करें और उन्हें बेवजह परेशान न किया जाए।


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