पालम, नई दिल्ली: बुधवार की सुबह दिल्ली के पालम इलाके के लिए किसी खौफनाक मंजर से कम नहीं थी। एक पांच मंजिला इमारत, धधकती आग की लपटें और उनके बीच फंसी 9 जिंदगियां जो पल भर में राख हो गईं। लेकिन इस तबाही के बीच एक ऐसी कहानी निकलकर आई है, जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी और एक पिता के जज्बे को आप सलाम करेंगे।
“मौत पीछे थी, और नीचे खाई…”: एक पिता का वो खौफनाक फैसला
इमारत की तीसरी मंजिल आग के गोले में तब्दील हो चुकी थी। 32 साल के अनिल के पास सोचने का वक्त नहीं था। गोद में डेढ़ साल की मासूम बच्ची और चारों तरफ जहरीला धुआं। जब दमकल की सीढ़ियां साथ छोड़ गईं, तो अनिल ने वो किया जो केवल एक ‘सुपरहीरो’ ही कर सकता है। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना अपनी लाडली को सीने से चिपकाया और तीसरी मंजिल से मौत की छलांग लगा दी।
नीचे गिरते वक्त बच्ची के पैर टूट गए, लेकिन पिता की छलांग ने उसे मौत के मुंह से खींच लिया। अनिल खुद एक गाड़ी से टकराकर गंभीर रूप से घायल हैं, पर उन्होंने साबित कर दिया कि पिता से बड़ा कोई रक्षक नहीं होता।
हथौड़े चले, दीवारें टूटीं… पर सिस्टम की हार हुई!
पड़ोसियों ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए अपनी जान दांव पर लगा दी। बगल की छत से हथौड़ों से दीवारें तोड़ी गईं, लेकिन अंदर फैला काला धुआं काल बनकर खड़ा था। इस हादसे में सबसे बड़ा सवाल दिल्ली के सिस्टम पर खड़ा हुआ है—लोगों का आरोप है कि दमकल की गाड़ियाँ तो आईं, लेकिन उनकी मशीनें फेल हो गईं। 50 मिनट की उस ‘नाकामी’ ने एक हंसते-खेलते परिवार का अंत कर दिया।
धुएं में सिमट गया पूरा कुनबा
मार्केट प्रेसिडेंट राजिंदर कश्यप के परिवार के 9 सदस्य अब इस दुनिया में नहीं हैं। शोरूम में रखे कपड़ों और कॉस्मेटिक्स ने आग में घी का काम किया, जिससे बचने का कोई मौका ही नहीं मिला।








