तेहरान/रियाद: इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’ के जवाब में ईरान ने अब युद्ध का दायरा बढ़ा दिया है। मंगलवार (3 मार्च) को ईरान ने दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत तेल कंपनी सऊदी अरामको (Saudi Aramco) के रास तनुरा (Ras Tanura) स्थित तेल प्लांट को निशाना बनाया। इस आत्मघाती ड्रोन हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की लपटें तेज हो गई हैं।
1. अरामको हमले की मुख्य बातें
-
भीषण आग और धुआं: सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ईरानी ड्रोन्स ने रास तनुरा रिफाइनरी के स्टोरेज टैंकों को निशाना बनाया। हमले के बाद रिफाइनरी के एक हिस्से में भीषण आग लग गई, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
-
उत्पादन ठप: सुरक्षा कारणों से सऊदी अरामको ने इस रिफाइनरी को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। रास तनुरा दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री तेल निर्यात टर्मिनल है, जिसकी क्षमता 5 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक है।
-
अमेरिकी ठिकाने भी निशाने पर: ईरान ने कतर, यूएई और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी मिसाइलें दागी हैं।
2. इजरायल का ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’
-
परमाणु केंद्रों पर प्रहार: इजरायली वायुसेना ने ईरान के नतान्ज (Natanz) परमाणु संयंत्र के प्रवेश द्वारों और महत्वपूर्ण इमारतों को भारी नुकसान पहुँचाया है। UN की परमाणु एजेंसी IAEA ने इसकी पुष्टि की है।
-
नेतृत्व का सफाया: इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरानी खुफिया मंत्रालय के दो शीर्ष अधिकारियों को मार गिराया है। इससे पहले सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत की खबरों के बाद ईरान में 7 दिनों के राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा की गई थी।
3. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
-
तेल की कीमतों में आग: अरामको पर हमले की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें 13% तक उछलकर $82 प्रति बैरल के पार चली गई हैं।
-
विमान सेवाएं ठप: दुबई और अबू धाबी जैसे बड़े हब से उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। खाड़ी देशों का एयरस्पेस बंद होने से लाखों यात्री फंसे हुए हैं।
4. भारत के लिए चिंता: एडवाइजरी जारी
-
भारतीय दूतावास की चेतावनी: तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने ताज़ा एडवाइजरी जारी कर वहां रह रहे 9,000 भारतीयों (छात्रों सहित) को घरों के अंदर रहने और गैर-ज़रूरी यात्रा न करने की सलाह दी है।
-
निकासी की योजना: भारत सरकार खाड़ी देशों में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए विशेष विमानों की व्यवस्था कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सऊदी अरब इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होता है, तो यह संघर्ष आधिकारिक रूप से ‘तृतीय विश्व युद्ध’ का रूप ले सकता है।
।।।








