कवर्धा 9 फरवरी। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में एक गांव ने अपनी बरसों पुरानी ऐसी पहचान को त्याग दिया है, जो ग्रामीणों के लिए किसी सामाजिक बोझ से कम नहीं थी। शासन की मुहर लगते ही ‘चंडालपुर’ अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है और इस गांव का नया सूर्योदय ‘चंदनपुर’ के रूप में हुआ है।
अपमान के घूंट से सम्मान की मिठास तक
ग्रामीणों के लिए यह केवल कागजी बदलाव नहीं, बल्कि दशकों के संकोच से आजादी है। ग्रामीणों ने साझा किया कि:
सामाजिक झिझक: बाहर जाने पर या रिश्तेदारों को गांव का नाम बताने में उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती थी।
नकारात्मक नजरिया: ‘चंडालपुर’ नाम सुनते ही लोग अक्सर अजीब टिप्पणियां करते थे, जिससे आत्मसम्मान को ठेस पहुंचती थी।
रिश्तों में अड़चन: वैवाहिक चर्चाओं या पारिवारिक बातचीत के दौरान गांव का नाम एक मनोवैज्ञानिक बाधा बन जाता था।
उत्सव सा माहौल, नई उम्मीदें
राज्य शासन द्वारा राजपत्र (Gazette) में अधिसूचना जारी होते ही गांव में दिवाली जैसा जश्न शुरू हो गया। ग्रामीणों का मानना है कि:
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नई पहचान: अब वे गर्व के साथ अपने गांव का नाम ले सकेंगे।
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पीढ़ियों का भला: आने वाली पीढ़ी को अब इस नाम के कारण किसी के सामने नीचा नहीं देखना पड़ेगा।
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सकारात्मक ऊर्जा: नाम बदलने से गांव की छवि सुधरेगी और विकास की नई राह खुलेगी।
“नाम का प्रभाव व्यक्तित्व और समाज पर गहरा पड़ता है। ‘चंदनपुर’ नाम अब हमारे गांव के विकास और सम्मान में नई सुगंध घोलेगा।” — उत्साहित ग्रामीण








