नागपुर: वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) के प्रबंधन ने आगामी 12 फरवरी 2026 को श्रमिक संगठनों द्वारा प्रस्तावित एक दिवसीय हड़ताल को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। कंपनी के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (CMD) हरीश दुहन ने एक आधिकारिक अपील जारी करते हुए कर्मचारियों से राष्ट्रहित में काम पर लौटने का आग्रह किया है।
बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है बुरा असर
WCL प्रबंधन के अनुसार, वर्तमान में कंपनी वित्त वर्ष 2025-26 के उत्पादन लक्ष्यों को प्राप्त करने के अंतिम चरण में है। मानसून के बाद कोयला उत्पादन अपनी पूरी गति पकड़ चुका है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में कार्य-अवरोध न केवल कंपनी के प्रदर्शन को प्रभावित करेगा, बल्कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों के विद्युत संयंत्रों को होने वाली ऊर्जा आपूर्ति में भी बाधा डालेगा, जिससे देश की बिजली सुरक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
हड़ताल पर जाने वालों पर ‘नो वर्क-नो पे’ की चेतावनी
प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि हड़ताल से जुड़े मुद्दे वर्तमान में श्रम प्रवर्तन प्राधिकरणों के समक्ष सुलह (Conciliation) की प्रक्रिया में हैं। औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के प्रावधानों के अनुसार, सुलह प्रक्रिया के दौरान हड़ताल पर जाना ‘गैर-कानूनी’ माना जाएगा। हड़ताल में शामिल होने वाले कर्मचारियों पर “काम नहीं तो वेतन नहीं” (No Work-No Pay) का नियम लागू होगा और उनके विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने की अपील
CMD हरीश दुहन ने श्रमिक संगठनों के पदाधिकारियों और श्रमिकों से अपील की है कि वे हड़ताल के निर्णय पर पुनर्विचार करें और प्रबंधन के साथ मिलकर कोयला उत्पादन एवं प्रेषण में सहयोग करें। उन्होंने ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान में कोयला क्षेत्र की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया है।
मुख्य बिंदु
▪️हड़ताल की तिथि: 12 फरवरी 2026।▪️प्रस्तावित द्वारा: विभिन्न श्रमिक संगठन।▪️WCL का रुख: हड़ताल गैर-कानूनी, ‘नो वर्क-नो पे’ लागू होगा।▪️संभावित प्रभाव: देश की ऊर्जा सुरक्षा और बिजली उत्पादन प्रभावित होने का डर।









