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बस्ती की राख में दफन हुए आशियाने: एक चिंगारी, 200 घर और अपनों को ढूंढती सजल आँखें

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लखनऊ (विकासनगर): बुधवार की दोपहर लखनऊ का सेक्टर-14 इलाका चीख-पुकार और धुएं के गुबार से थर्रा उठा। विकासनगर की झुग्गी-झोपड़ी बस्ती में लगी भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और लगभग 200 झोपड़ियां जलकर खाक हो गईं।

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धमाकों ने बढ़ाई दहशत आग इतनी भयावह थी कि झोपड़ियों में रखे गैस सिलेंडर और रेफ्रिजरेटर के कंप्रेसर एक के बाद एक फटने लगे। इन धमाकों की गूंज और आसमान छूती लपटों ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। जो लोग दोपहर की सुस्ती में थे, उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला। लोग अपनी जान बचाने के लिए नंगे पैर ही भागने को मजबूर हुए।

18 दमकल गाड़ियां और घंटों की मशक्कत सूचना मिलते ही दमकल विभाग की 18 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद भी आग की लपटों पर काबू पाना चुनौतीपूर्ण बना रहा। प्रशासन की टीमें राहत कार्य में जुटी हैं, लेकिन तब तक सैकड़ों परिवारों का सब कुछ खत्म हो चुका था।

शमशुनिशां का दर्द: “सब राख हो गया, अब अपनों को कहां ढूंढूं?” हादसे के बीच सबसे मार्मिक दृश्य तब दिखा जब शमशुनिशां नाम की महिला रोते-बिलखते अपने परिवार को ढूंढती नजर आईं। उन्होंने रुंधे गले से बताया कि आग लगने के वक्त उनके परिजन अंदर ही थे और अब उनका कुछ पता नहीं चल रहा। ऐसे कई परिवार हैं जिनके जरूरी दस्तावेज, मेहनत की कमाई और सिर की छत एक झटके में छीन ली गई।

असुरक्षा के बीच उजड़ती जिंदगियां यह हादसा फिर से झुग्गी बस्तियों में रहने वाले गरीबों की असुरक्षा की ओर इशारा करता है। फिलहाल प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है, लेकिन उन आंसुओं की भरपाई करना मुश्किल है जो अपनी ही आंखों के सामने अपने घर को राख होते देख रहे थे।


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