Latest News
Home » राजनीति » जेल के ताले टूट गए, कवासी दादा छूट गए: भूपेश बघेल का सरकार पर तीखा वार

जेल के ताले टूट गए, कवासी दादा छूट गए: भूपेश बघेल का सरकार पर तीखा वार

Share:

“आदिवासियों को बंद करने का षड्यंत्र नहीं चलेगा”, लखमा की रिहाई पर पूर्व सीएम ने ‘सत्यमेव जयते’ लिखकर जताया हर्ष

रायपुर, 04 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ के कद्दावर आदिवासी नेता और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की जेल से रिहाई के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लखमा की रिहाई का स्वागत एक बेहद आक्रामक और शायराना अंदाज में किया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर सरकार को घेरते हुए लिखा— “जेल के ताले टूट गए, कवासी दादी छूट गए। सत्यमेव जयते!! आदिवासियों को ताले में बंद करने का षड्यंत्र नहीं चलेगा।”

क्या है पूरा मामला?

कवासी लखमा को कथित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। तब से वे रायपुर की सेंट्रल जेल में बंद थे। करीब एक साल बाद, 3 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दो अलग-अलग मामलों (ED और ACB/EOW) में अंतरिम जमानत प्रदान की। आज (4 फरवरी) को औपचारिकताओं के बाद वे जेल से बाहर आए, जहाँ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया।

बघेल के तंज के सियासी मायने

भूपेश बघेल का यह बयान सीधे तौर पर सत्ताधारी भाजपा सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों पर निशाना है। उनके पोस्ट के तीन प्रमुख बिंदु सियासी गलियारों में चर्चा का विषय हैं:

  1. षड्यंत्र का आरोप: बघेल ने लखमा की गिरफ्तारी को आदिवासियों के खिलाफ एक बड़ी साजिश करार दिया है।

  2. सत्यमेव जयते: रिहाई को उन्होंने ‘सत्य की जीत’ बताते हुए यह संदेश दिया कि उन पर लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित थे।

  3. आदिवासी कार्ड: बस्तर के ‘टाइगर’ कहे जाने वाले लखमा की रिहाई को आदिवासी अस्मिता से जोड़कर कांग्रेस आगामी चुनावों और स्थानीय समीकरणों को साधने की कोशिश कर रही है।

कड़ी शर्तों पर मिली है जमानत

भले ही कांग्रेसी खेमे में जश्न का माहौल है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने लखमा की जमानत के लिए कुछ सख्त शर्तें भी रखी हैं:▪️उन्हें जमानत अवधि के दौरान छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा।▪️वे राज्य में केवल अदालती पेशी के लिए ही प्रवेश कर सकेंगे।▪️उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और जांच में सहयोग करना होगा।

Leave a Comment