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छत्तीसगढ़ : अन्नदाता की उम्मीदें और समय की चुनौती

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संकट की जड़: टोकन और तकनीकी अवरोध

The khatiya khadi news छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ ‘धान’ है और इस धान को उगाने वाला किसान आज एक अजीब सी कशमकश में फंसा हुआ है। एक तरफ बंपर पैदावार की खुशी है, तो दूसरी तरफ समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेच पाने की अनिश्चितता। राज्य सरकार द्वारा निर्धारित 31 जनवरी की समय सीमा जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, प्रदेश के करीब दो लाख किसानों की धड़कनें तेज हो गई हैं, जिनके टोकन अब तक नहीं कट पाए हैं।

संकट की जड़: टोकन और तकनीकी अवरोध महासमुंद जिले से आ रही खबरें विचलित करने वाली हैं। जब किसानों का सत्यापन हो चुका है, तो फिर उन्हें टोकन के लिए दफ्तरों के चक्कर क्यों काटने पड़ रहे हैं? भूकेल जैसी समितियों में किसानों का आक्रोश जायज है। किसान का काम खेत में पसीना बहाना है, न कि अपने ही हक की उपज बेचने के लिए कलेक्टोरेट की दहलीज पर फोन कॉल का इंतजार करना। प्रशासन की संवेदनहीनता और संवाद की कमी किसानों के असंतोष को और भड़का रही है।

राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता हालांकि, कृषि मंत्री रामविचार नेताम और सहकारिता मंत्री केदार कश्यप द्वारा तारीख बढ़ाने के संकेत देना एक सकारात्मक पहल है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को अब इस दिशा में त्वरित और संवेदनशील निर्णय लेने की आवश्यकता है। धान खरीदी केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के लाखों परिवारों के साल भर के राशन, बच्चों की शिक्षा और कर्ज अदायगी का आधार है।

विपक्ष और किसान संगठनों का एकजुट सुर यह दुर्लभ है कि सत्ता पक्ष का किसान मोर्चा और विपक्ष (कांग्रेस, आप) एक ही मांग पर सुर मिला रहे हों। यह इस बात का प्रमाण है कि समस्या गंभीर है। जब दो लाख किसानों के टोकन ही नहीं कटे हैं, तो 31 जनवरी को खरीदी बंद करना उन किसानों के साथ अन्याय होगा जिन्होंने अपना सब कुछ दांव पर लगाकर फसल उगाई है।

समय की मांग सरकार को चाहिए कि वह न केवल खरीदी की तारीख बढ़ाए, बल्कि उन तकनीकी बाधाओं को भी दूर करे जिनकी वजह से टोकन प्रक्रिया रुकी हुई है। जिला प्रशासन, विशेषकर महासमुंद जैसे क्षेत्रों में, कलेक्टर और विभागीय अधिकारियों को किसानों के साथ सीधे संवाद की नीति अपनानी चाहिए।

अन्नदाता को ‘घबराहट’ और ‘निराशा’ में छोड़ना किसी भी लोक-कल्याणकारी सरकार के लिए उचित नहीं है। उम्मीद है कि मुख्यमंत्री जल्द ही तारीख बढ़ाने की घोषणा करेंगे, ताकि छत्तीसगढ़ का कोई भी  किसान अपनी फसल बिचौलियों को औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर न हो।

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