छत्तीसगढ़ के पुलिस महकमे से आई 1480 पन्नों की वह जांच रिपोर्ट केवल एक महिला अधिकारी और एक कारोबारी के रिश्तों का कच्चा चिट्ठा नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था के चेहरे पर लगा एक गहरा काला दाग है। दंतेवाड़ा जैसी संवेदनशील जगह पर पदस्थ एक डीएसपी स्तर की अधिकारी का उपहारों के बदले देश की आंतरिक सुरक्षा और नक्सल ऑपरेशनों जैसी गोपनीय जानकारी साझा करना ‘भ्रष्टाचार’ से कहीं आगे ‘विश्वासघात’ की श्रेणी में आता है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
खतरनाक है यह गठजोड़ जब वर्दीधारी अधिकारी करोड़ों के डायमंड रिंग, लक्जरी कारों और महंगे मोबाइल के मोहपास में बंध जाते हैं, तो न्याय की उम्मीद दम तोड़ने लगती है। एक कारोबारी का पुलिस अधिकारी पर दो करोड़ रुपये खर्च करना कोई निवेश नहीं, बल्कि कानून को अपनी जेब में रखने की साजिश थी। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि व्हाट्सएप पर नक्सलियों के खिलाफ होने वाली गुप्त रणनीतियों को लीक किया गया। यह उन जवानों के जीवन के साथ खिलवाड़ है जो जंगलों में अपनी जान हथेली पर रखकर लड़ रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
सिस्टम में घुन की तरह लगा भ्रष्टाचार इस पूरे प्रकरण में तेलीबांधा के तत्कालीन टीआई की भूमिका ने आग में घी डालने का काम किया है। रिपोर्ट दर्ज करने के नाम पर 15 लाख की ‘डील’ करना और उसमें से 10 लाख खुद डकार लेना यह दर्शाता है कि कुछ अधिकारियों के लिए थाना न्याय का मंदिर नहीं, बल्कि वसूली का अड्डा बन चुका है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और समझौते की रकम में बंदरबांट करने लगें, तो आम आदमी की सुरक्षा का भगवान ही मालिक है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
कठोर कार्रवाई की दरकार गृह विभाग के पास अब पुख्ता सबूत हैं। यह समय केवल ‘कारण बताओ नोटिस’ या ‘निलंबन’ तक सीमित रहने का नहीं है। अगर इस मामले में ऐसी मिसाल कायम नहीं की गई जो भविष्य के लिए सबक बने, तो वर्दी पर जनता का भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। विभाग को यह समझना होगा कि भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता का यह वायरस अगर समय रहते नहीं रोका गया, तो यह पूरी कानून व्यवस्था को खोखला कर देगा।
वर्दी सिर्फ एक लिबास नहीं, कर्तव्य और मर्यादा की शपथ है। जब यह शपथ टूटती है, तो केवल एक अधिकारी नहीं गिरता, बल्कि पूरा लोकतंत्र शर्मसार होता है। ~संपादक








