सोशल मीडिया पर फूटा वरिष्ठ नेता का गुस्सा, राहुल-प्रियंका को घेरा
MP Politics 5 Jun : भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से दो बार कांग्रेस के प्रत्याशी रह चुके और पार्टी के वरिष्ठ नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने आलाकमान के इस फैसले के खिलाफ बगावती बिगुल फूंक दिया है। ज्ञानचंदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर सीधे कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधा।
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उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को टैग करते हुए अपनी पोस्ट में लिखा कि मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार के चयन में पार्टी से बहुत बड़ी चूक हुई है।//आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// ज्ञानचंदानी ने खुलासा किया कि उन्होंने पहले भी नेतृत्व को संदेश भेजकर आगाह किया था कि उम्मीदवार का चयन बेहद सोच-समझकर किया जाए, क्योंकि राज्य के वर्तमान सियासी हालात में क्रॉस वोटिंग (Cross-Voting) का खतरा बहुत ज्यादा है।

“दिग्विजय सिंह होते तो सुरक्षित रहती सीट”
नरेश ज्ञानचंदानी ने अपनी पोस्ट में पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का पुरजोर समर्थन किया।//आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// उन्होंने दावा किया कि:
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अगर दिग्विजय सिंह को उम्मीदवार बनाया जाता, तो कांग्रेस की यह सीट शत-प्रतिशत सुरक्षित रहती।
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दिग्विजय सिंह की मध्य प्रदेश के विधायकों पर बेहद मजबूत पकड़ और व्यक्तिगत प्रभाव है, जो संकट के समय वोट बिखरने नहीं देते।
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मीनाक्षी नटराजन के नाम पर विधायकों के भीतर आम सहमति नहीं है, जिसके कारण कांग्रेस को राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बहती गंगा में भाजपा ने धोए हाथ, कसा तंज
कांग्रेस के इस अंदरूनी कलह को भांपते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी चौका मारने में देरी नहीं की। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल ने X पर पोस्ट कर कांग्रेस की गुटबाजी पर तीखा हमला बोला।//आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज//
“राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी का आंतरिक विरोध शुरू हो गया है। चुनाव से पहले ही असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के फैसलों पर अब पार्टी के अपने नेता और कार्यकर्ता ही सवाल उठा रहे हैं।” — आशीष उषा अग्रवाल, प्रदेश मीडिया प्रभारी, BJP
अग्रवाल ने आगे कहा कि अब क्रॉस वोटिंग केवल एक आशंका नहीं, बल्कि इसके स्पष्ट संकेत दिखाई देने लगे हैं। //आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// जब विरोधी नहीं, बल्कि अपने ही लोग नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठाने लगें, तो हार के संकेत स्वतः ही दिखाई देने लगते हैं।
अंदरूनी कलह से कांग्रेस की राह हुई मुश्किल
इस विवाद ने कांग्रेस के सामने कई गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं:
| चुनौती के मुख्य बिंदु | संभावित प्रभाव |
|---|---|
| विधायकों की एकजुटता | मीनाक्षी नटराजन के नाम पर नाराजगी के कारण विधायकों को एक पाले में रखना मुश्किल होगा। |
| क्रॉस वोटिंग का खतरा | असंतुष्ट विधायक ऐन वक्त पर पाला बदल सकते हैं या पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर वोट कर सकते हैं। |
| नेतृत्व की साख पर सवाल | राहुल और प्रियंका गांधी के फैसले को राज्य स्तर पर खुली चुनौती मिलने से आलाकमान की स्थिति कमजोर हुई है। |
हाईकमान के सामने कड़ी परीक्षा
राज्यसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ी कांग्रेस के लिए यह सार्वजनिक असंतोष किसी बड़े झटके से कम नहीं है। अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश संगठन इस खुले विरोध को शांत करने के लिए क्या डैमेज कंट्रोल कदम उठाता है, या फिर यह विवाद पार्टी को एक और चुनावी हार की ओर धकेल देगा।







