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कबीरपंथी आस्था और सियासी जंग: डॉ. चरणदास महंत ने शंकराचार्य मामले में केंद्र सरकार को घेरा

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रायपुर, छत्तीसगढ़ 20 जनवरी 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी के साथ हुए व्यवहार को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। डॉ. महंत ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सत्ता के ‘धन और बल’ के अहंकार में यह सरकार संतों का सत्कार करना भूल गई है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

“मैं कबीरपंथी हूँ, संत का स्थान राजा से ऊपर”

डॉ. महंत ने अपनी धार्मिक आस्था का हवाला देते हुए कहा, “मैं स्वयं एक कबीर पंथी हूँ और कबीर साहब ने सिखाया है कि ‘साधु भूखा भाव का, धन का भूखा नाहिं।’ एक कबीर पंथी होने के नाते मेरा मानना है कि संत का स्थान राजा के सिंहासन से कहीं ऊंचा होता है, लेकिन आज की सत्ता खुद को भगवान से भी बड़ा समझने लगी है।”

शंकराचार्य के अपमान पर जताई आपत्ति

प्रयागराज की घटना का जिक्र करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पूज्य पाद शंकराचार्य जी को स्नान से रोकना और उनके साथ दुर्व्यवहार करना पराकाष्ठा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार केवल उन्हीं संतों का सम्मान करती है जो उनके राजनीतिक एजेंडे में ‘हाँ में हाँ’ मिलाते हैं। जो संत सरकार की कमियों पर सवाल उठाते हैं, उन्हें कभी सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाता है तो कभी पुलिस के जरिए प्रताड़ित किया जाता है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

सरकार से माफी की मांग

डॉ. महंत ने शंकराचार्य जी के साथ हुए व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि शंकराचार्य केवल अपनी परंपरा और सम्मान की रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि सरकार इस कृत्य के लिए अविलंब माफी मांगे।

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