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बंदर वाले बयान पर बवाल: पूर्व CM भूपेश बघेल के खिलाफ साहू समाज ने खोला मोर्चा, 10 दिन का अल्टीमेटम

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Chhattisgarh Politics & Controversial Statement | छत्तीसगढ़ की राजनीति में ‘बयानों के बाण’ अब सामाजिक आक्रोश का रूप लेने लगे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा डिप्टी सीएम अरुण साव की तुलना ‘बंदर’ से किए जाने पर साहू समाज उबल पड़ा है। समाज के पदाधिकारियों ने इसे न केवल अमर्यादित बताया है, बल्कि इसे पूरे साहू समाज का अपमान करार देते हुए एसएसपी को ज्ञापन सौंपा है।

क्या है पूरा मामला?

विवाद की जड़ 29 दिसंबर 2025 की वह सभा है, जब भूपेश बघेल बिलासपुर के लिंगियाडीह में बस्ती उजाड़ने के विरोध में आयोजित आंदोलन में शामिल होने पहुंचे थे। वहां संबोधन के दौरान बघेल ने एक दंतकथा का जिक्र करते हुए कहा कि “जंगल में शेर की जगह बंदर को राजा बना दिया गया।” उन्होंने इस कहानी के जरिए डिप्टी सीएम अरुण साव की कार्यप्रणाली पर तंज कसा था। इसी टिप्पणी को अब साहू समाज ने अपने मान-सम्मान से जोड़ लिया है।

“माफी मांगें या आंदोलन झेलें”

बिलासपुर जिला साहू संघ के अध्यक्ष तिलकराम साहू के नेतृत्व में समाज के प्रतिनिधियों ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि अरुण साव समाज के गौरव हैं और उनके खिलाफ ऐसी टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

समाज की मुख्य मांगें:

  • भूपेश बघेल 10 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से अपने बयान पर माफी मांगें।

  • दिए गए बयान को तत्काल वापस लिया जाए।

  • चेतावनी दी गई है कि यदि समयसीमा में माफी नहीं मांगी गई, तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

भूपेश बघेल ने न केवल अरुण साव बल्कि विधायक अमर अग्रवाल पर भी विकास कार्यों को लेकर तीखे हमले किए थे। हालांकि, ‘बंदर’ वाली टिप्पणी ने इस राजनीतिक बहस को सामाजिक विवाद में तब्दील कर दिया है। साहू समाज के प्रतिनिधियों ने इस मामले में रजनेश सिंह से भी मुलाकात कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

अब सबकी नजरें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर टिकी हैं कि क्या वे इस विवाद को शांत करने के लिए कदम उठाते हैं या यह गतिरोध आने वाले दिनों में किसी बड़े सियासी और सामाजिक टकराव का कारण बनेगा।

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