कोरबा, छत्तीसगढ़ आमतौर पर जब भी कोई बड़ा अधिकारी निरीक्षण पर निकलता है, तो माहौल में एक औपचारिक सख्ती होती है। लेकिन कोरबा जिले के ग्राम आमाखोखरा के आंगनबाड़ी केंद्र भांठापारा में नजारा कुछ अलग ही था। यहाँ कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने पद की गरिमा और बच्चों की मासूमियत के बीच की दूरी को ‘नमस्ते’ और ‘थैंक्यू’ जैसे छोटे शब्दों से पाट दिया। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
फूलों से हुआ स्वागत, बातों से बढ़ी दोस्ती



जैसे ही कलेक्टर केंद्र के द्वार पर पहुंचे, छोटे-छोटे बच्चे हाथ में गुलदस्ता लिए उनका इंतजार कर रहे थे। अमूमन अजनबियों को देखकर सहम जाने वाले बच्चों की हिचक तब दूर हो गई, जब कलेक्टर ने एक बच्चे की तरह ही उनसे बात की। उन्होंने बच्चों से गुलदस्ता स्वीकार किया और उन्हें ‘नमस्ते’, ‘थैंक्यू’ और ‘जय हो’ कहकर उत्साह बढ़ाया। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
अक्षर-ज्ञान की परीक्षा और शाबाशी

कलेक्टर ने केवल औपचारिक निरीक्षण नहीं किया, बल्कि वे बच्चों के बीच जमीन पर जा बैठे। उन्होंने बच्चों से उनके नाम पूछे, अक्षर-ज्ञान की परख की और रंगों की पहचान कराई। बच्चों ने भी बिना डरे कलेक्टर के हर सवाल का बेबाकी से जवाब दिया। नन्हे बच्चों के ज्ञान को देखकर कलेक्टर ने मुस्कुराते हुए उन्हें शाबाशी दी। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
व्यवस्थाओं की बारीकी से समीक्षा
संवाद के साथ-साथ कलेक्टर ने केंद्र की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं की समीक्षा की:
-
ग्रोथ चार्ट: बच्चों के वजन और लंबाई की ट्रैकिंग।
-
पोषण: कुपोषित बच्चों की स्थिति और नाश्ता वितरण की गुणवत्ता।
-
डिजिटल ट्रैकिंग: पोषण ट्रैकर ऐप की अद्यतन स्थिति।
-
योजनाएं: प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और गर्भवती/शिशुवती माताओं को मिलने वाले पूरक आहार की जानकारी।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने कार्यकर्ता और सहायिका को निर्देश दिए कि बच्चों के पोषण और उनकी प्रारंभिक शिक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए।








