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अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में मादुरो हिरासत में, वैश्विक तेल बाजार में हलचल… विवाद की जड़: तेल भंडार या ड्रग सिंडिकेट?

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वॉशिंगटन/काराकस: दक्षिण अमेरिका से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच लंबे समय से जारी तनाव अब पूर्ण सैन्य संघर्ष में तब्दील हो गया है। अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस पर बड़ा हमला करते हुए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके पद से हटाकर हिरासत में ले लिया है।

सैन्य ऑपरेशन और सत्ता परिवर्तन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस कार्रवाई की पुष्टि की है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी सेना ने काराकस में रक्षा मंत्री के आवास और प्रमुख नौसैनिक अड्डों को निशाना बनाया। एक बड़े गुप्त ऑपरेशन के तहत राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर देश से बाहर भेज दिया गया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक वेनेजुएला में पूरी तरह सत्ता परिवर्तन नहीं हो जाता, तब तक सैन्य दबाव और कार्रवाई जारी रहेगी।

विवाद की जड़: तेल भंडार या ड्रग सिंडिकेट?

इस टकराव के पीछे दोनों पक्षों के अपने तर्क हैं:

  • मादुरो का आरोप: पूर्व राष्ट्रपति मादुरो ने पहले ही आगाह किया था कि अमेरिका की नजर वेनेजुएला के ओरिनोको बेल्ट में स्थित दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार पर है।

  • अमेरिका का पक्ष: अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि मादुरो शासन अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का हिस्सा था। अमेरिका का कहना है कि वैश्विक तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए मादुरो का हटना अनिवार्य था।

वैश्विक तेल बाजार पर असर (Data Analysis)

इस सैन्य कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तत्काल उछाल देखा गया है।

मानक (Benchmark) वर्तमान कीमत (जनवरी 2026) स्थिति
ब्रेंट क्रूड $61.03 प्रति बैरल तेजी
WTI क्रूड $57.59 प्रति बैरल तेजी

बाजार का रुख: साल 2025 में मांग में कमी के कारण तेल की कीमतें करीब 20% तक गिर गई थीं, लेकिन इस ‘जियो-पॉलिटिकल रिस्क’ के कारण कीमतों में फिर से उबाल आने लगा है। मार्च 2025 में जब ट्रंप ने प्रतिबंधों की धमकी दी थी, तब ब्रेंट $73.79 तक पहुंच गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपूर्ति बाधित हुई, तो कीमतें और बढ़ सकती हैं।

भारत पर प्रभाव: ऊर्जा सुरक्षा का सवाल

भारत के नजरिए से देखें तो स्थिति फिलहाल नियंत्रण में नजर आती है:

  1. सीमित निर्भरता: जून 2024 के आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल तेल आयात में वेनेजुएला की हिस्सेदारी मात्र 0.92% (लगभग 22 मिलियन बैरल) थी।

  2. अमेरिकी दबाव: वॉशिंगटन के कड़े रुख के कारण भारत ने पहले ही वेनेजुएला से तेल की खरीद लगभग बंद कर दी है।

  3. विकल्प: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मुख्य रूप से मध्य-पूर्व (Mid-East) और रूस पर निर्भर है, इसलिए वेनेजुएला संकट से भारत की फिजिकल सप्लाई चेन पर बड़ा संकट नहीं है, हालांकि वैश्विक कीमतें बढ़ने से देश में पेट्रोल-डीजल के दाम प्रभावित हो सकते हैं।

वेनेजुएला की आर्थिक बदहाली

दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार होने के बावजूद, कुप्रबंधन और प्रतिबंधों के चलते वेनेजुएला का तेल निर्यात लगातार गिरा है। 2023 में जहां सऊदी अरब ने $181 अरब का तेल निर्यात किया, वहीं वेनेजुएला महज $4.05 अरब पर सिमट गया था। ताज़ा प्रतिबंधों से वेनेजुएला को अपने जीडीपी के 10% हिस्से ($4.9 अरब) का नुकसान होने का अनुमान है।

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