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महाराष्ट्र में फिर चला ‘महायुति’ का जादू: स्थानीय निकाय चुनावों में क्लीन स्वीप, विपक्ष पस्त,BJP नम्बर 1पर

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मुंबई | विशेष संवाददाता महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ‘महायुति’ का भगवा परचम लहराया है। राज्य में हुए नगर पंचायत और नगर परिषद चुनावों के रुझानों ने साफ कर दिया है कि जनता का झुकाव अब भी सत्ताधारी गठबंधन की ओर है। 2024 के विधानसभा चुनावों की ऐतिहासिक जीत के ठीक एक साल बाद आए इन परिणामों ने विपक्षी गठबंधन ‘महाविकास अघाड़ी’ (MVA) के भविष्य पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

आंकड़ों में महायुति का दबदबा

रुझानों के अनुसार, महायुति ने विपक्ष को बहुत पीछे छोड़ दिया है। कुल सीटों के समीकरण कुछ इस प्रकार हैं:

गठबंधन / पार्टी सीटें (रुझान)
महायुति (कुल) 218
भारतीय जनता पार्टी (BJP) 127
शिवसेना (शिंदे गुट) 54
एनसीपी (अजीत पवार) 37
महाविकास अघाड़ी (MVA कुल) 47
कांग्रेस 31
शिवसेना (UBT) 09
एनसीपी (शरद पवार) 07
अन्य 23

BMC चुनाव से पहले ‘लिटमस टेस्ट’ में पास

अगले महीने होने वाले देश के सबसे अमीर नगर निगम—बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC)—के चुनावों से पहले इन नतीजों को एक ‘लिटमस टेस्ट’ माना जा रहा था। महायुति ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर यह संदेश दे दिया है कि उनकी मशीनरी जमीनी स्तर पर बेहद सक्रिय है।

विपक्ष की सुस्ती और महायुति का समन्वय

कृषि संकट, महिलाओं की कल्याणकारी योजनाओं में आंशिक भुगतान और किसानों की आर्थिक मदद जैसे संवेदनशील मुद्दों के बावजूद महाविकास अघाड़ी जनता को लुभाने में विफल रही।

  • कांग्रेस का संघर्ष: विदर्भ और मराठवाड़ा में कांग्रेस ने मेहनत तो की, लेकिन उसे अन्य सहयोगियों का साथ नहीं मिला।

  • मिसिंग लीडरशिप: ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, शिवसेना (UBT) और एनसीपी (शरद पवार) के बड़े नेता प्रचार के दौरान मैदान से गायब दिखे, जिसका सीधा नुकसान वोट शेयर पर पड़ा।

  • शिंदे-बीजेपी का तालमेल: गठबंधन में छिटपुट तनाव की खबरों के बीच मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा नेतृत्व ने जबरदस्त समन्वय दिखाया, जो जीत का मुख्य आधार बना।

राजनीतिक गलियारों की गूंज: > जानकारों का मानना है कि यह जीत केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि रणनीति की है। जहां महायुति ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी, वहीं MVA के भीतर आपसी सामंजस्य की कमी साफ दिखाई दी।