कोरबा छत्तीसगढ़ 21 दिसंबर। शहर के इंदिरा नगर (दुरपा रोड) में इन दिनों डर और अनिश्चितता का माहौल है। वर्षों से बसे सैकड़ों परिवारों के लिए अब अस्तित्व की लड़ाई शुरू हो गई है। एक तरफ स्थानीय जनप्रतिनिधियों का ‘आश्वासन’ है, तो दूसरी तरफ रेलवे का ‘बुलडोजर’ जो किसी भी वक्त उनके आशियानों को जमींदोज कर सकता है।
30 दिसंबर से शुरू होगी कार्रवाई, रेलवे अडिग
रेलवे ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी जमीन को खाली कराकर ही दम लेगा। रेल पथ अभियंता कार्यालय द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, किलोमीटर 705/8 से 705/10 के बीच हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए 24 दिसंबर तक की समय सीमा दी गई है। चेतावनी दी गई है कि 30 दिसंबर से विध्वंस की कार्रवाई (तोड़फोड़) शुरू कर दी जाएगी। 17 दिसंबर को रिमाइंडर जारी होने के बाद यार्ड विस्तार का काम भी गति पकड़ चुका है और मौके पर भारी मशीनरी पहुंचनी शुरू हो गई है।
मिला आश्वासन!
प्रभावित लोगों ने अपनी छतों को बचाने के लिए रेलवे अधिकारियों से लेकर कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन और मेयर तक गुहार लगाई है। हालांकि, मंत्री की ओर से सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन मिला है, लेकिन जमीनी हकीकत लोगों को डरा रही है। रेलवे की सक्रियता देख अब जनता का सब्र टूट रहा है। लोगों का कहना है— “जब सामान खुद ही समेटना पड़ रहा है, तो नेताओं के भरोसे का क्या मोल?”
पलायन और मजबूरी का फायदा
दहशत का आलम यह है कि कई परिवारों ने डर के मारे घर खाली करना शुरू कर दिया है। इसका सीधा असर शहर के रेंटल मार्केट पर पड़ा है:
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महंगा हुआ किराया: घर खाली करने वाले लोग जब दूसरी जगह जा रहे हैं, तो मकान मालिकों ने अचानक कमरों के दाम बढ़ा दिए हैं।
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अतिक्रमण की होड़: बेघर होने के डर से कुछ लोग आसपास की नगर निगम और राजस्व की खाली जमीनों पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं।
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सिंचाई विभाग की चुप्पी: नदी किनारे हो रहे नए अतिक्रमणों पर सिंचाई विभाग मौन है, जबकि यह क्षेत्र मानसून के दौरान बेहद संवेदनशील और डूबान क्षेत्र में आता है।
दोराहे पर खड़ी जनता
इंदिरा नगर आज एक ऐसे दोराहे पर है जहां एक तरफ प्रशासनिक सख्ती है और दूसरी तरफ राजनीतिक वादे। रेलवे के यार्ड निर्माण के लिए सामानों का पहुंचना इस बात का संकेत है कि विभाग पीछे हटने के मूड में नहीं है। अब देखना यह होगा कि 24 दिसंबर की डेडलाइन खत्म होने के बाद प्रशासन क्या रुख अपनाता है।








