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भिलाई में सर्वे पर बवाल: ‘क्या बघेल की गिरफ्तारी हो?’ सवाल पर भड़की कांग्रेस, पूर्व CM ने अमित शाह को ललकारा

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भिलाई/रायपुर | छत्तीसगढ़ की राजनीति में शनिवार को उस वक्त जबरदस्त उबाल आ गया, जब भिलाई के सेक्टर-4 में सर्वे कर रही एक निजी एजेंसी की टीम को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बंधक बना लिया। इस सर्वे में शामिल विवादास्पद सवालों ने राज्य की सियासत में ‘सर्वे वार’ छेड़ दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस घटना के बाद सीधे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर हमला बोलते हुए कहा कि वे डरने वाले नहीं हैं।

 

सर्वे के सवालों पर छिड़ा संग्राम

गाजियाबाद की सर्वे कंपनी “वाट्स इंडिया थिंक” की टीम भिलाई में घर-घर जाकर 24 सवालों की एक सूची पर लोगों की राय ले रही थी। विवाद तब शुरू हुआ जब सर्वे में शामिल एक विशेष सवाल सामने आया: “क्या पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को गिरफ्तार किया जाना चाहिए?” इसके अलावा सर्वे में पिछली सरकार के कथित शराब घोटाले और सरकारी योजनाओं को लेकर भी सवाल पूछे जा रहे थे।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश चंद्राकर और महापौर धीरज बाकलीवाल के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने टीम के 6 सदस्यों को पकड़कर भट्ठी थाने पहुँचाया। कांग्रेसियों का आरोप है कि यह सर्वे पूरी तरह अनधिकृत, भ्रामक और राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है।

भूपेश बघेल का तीखा पलटवार: “अमित शाह जी! डरूँगा नहीं”

घटना के तुरंत बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मोर्चा खोल दिया। उन्होंने इसे केंद्रीय गृहमंत्री की साजिश करार देते हुए लिखा:

“अमित शाह जी, गजब के गृहमंत्री हैं! विधि सम्मत कार्रवाई की जगह अब सर्वे करवा रहे हैं। महादेव ऐप में नाकाम होने के बाद अब शराब घोटाले में घसीटने की कोशिश हो रही है। छत्तीसगढ़ की जनता कांग्रेस के साथ है। हम गोरों से नहीं डरे तो आपसे क्या डरेंगे? न डरे हैं, न डरेंगे; लड़ रहे हैं और लड़ेंगे।”

बघेल ने यह भी दावा किया कि पूरे प्रदेश में ऐसी करीब 70 टीमें सक्रिय हैं जो उनकी छवि खराब करने का काम कर रही हैं।

पृष्ठभूमि: जाँच की तपिश और सियासी रार

यह पूरा विवाद ₹2,100 करोड़ के कथित शराब घोटाले की पृष्ठभूमि में उपजा है। साल 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई तेज हुई है, जिसमें बघेल के करीबियों और उनके बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी के बाद सियासत पहले से ही गरम थी। भाजपा जहाँ इसे भ्रष्टाचार के विरुद्ध “जीरो टॉलरेंस” की नीति बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे आगामी चुनावों से पहले विपक्ष की आवाज दबाने का ‘टूल’ कह रही है।

थाने में घंटों चला हाई-वोल्टेज ड्रामा

भट्ठी थाने में शनिवार देर शाम तक गहमागहमी बनी रही। कांग्रेस कार्यकर्ता सर्वे टीम के खिलाफ FIR दर्ज कराने पर अड़े रहे। पुलिस टीम के सदस्यों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस सर्वे का फंडिंग सोर्स क्या है और इसे किसके इशारे पर कराया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना ने छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस के बीच की खाई को और गहरा कर दिया है। जहाँ एक तरफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर कानूनी घेराबंदी बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ ‘पब्लिक ओपिनियन’ के नाम पर हो रहे ऐसे सर्वे आने वाले समय में बड़े चुनावी मुद्दे बन सकते हैं।

कांग्रेस का पक्ष (आक्रामक रुख)

राजनीतिक षड्यंत्र का आरोप: कांग्रेस का मानना है कि यह कोई सामान्य सर्वे नहीं, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री की छवि धूमिल करने के लिए रचा गया एक सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र है।

संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग: पार्टी का कहना है कि जब कानूनी तौर पर कुछ हासिल नहीं हो रहा, तो केंद्र सरकार और एजेंसियां अब जनमत को प्रभावित करने के लिए निजी एजेंसियों का सहारा ले रही हैं।

गोपनीयता और सुरक्षा का उल्लंघन: कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि बाहरी राज्यों की टीमें बिना किसी स्थानीय अनुमति के संवेदनशील राजनीतिक सवाल पूछ रही हैं, जिससे सामाजिक शांति भंग हो सकती है।

भ्रष्टाचार के आरोपों को डायवर्जन बताना: भूपेश बघेल का स्पष्ट कहना है कि जब पीएमओ के अधिकारियों पर सवाल उठे, तो ध्यान भटकाने के लिए पुराने शराब घोटाले और इस तरह के सर्वे का सहारा लिया जा रहा है।

भाजपा का पक्ष (जवाबदेही और जांच)

जनता की राय जानने का अधिकार: भाजपा का सामान्य स्टैंड यह रहता है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में एजेंसियां या संस्थाएं जनता का मूड जानने के लिए स्वतंत्र हैं और इसमें कुछ भी अवैध नहीं है।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: भाजपा नेताओं का तर्क है कि ₹2,100 करोड़ का शराब घोटाला कोई काल्पनिक आरोप नहीं है, बल्कि ED की जांच में मिले तथ्यों पर आधारित है। यदि जनता की राय ली जा रही है, तो कांग्रेस को डर क्यों लग रहा है?

कानूनी प्रक्रिया का बचाव: सत्ता पक्ष का कहना है कि जांच एजेंसियां साक्ष्यों के आधार पर काम कर रही हैं। बेटे की गिरफ्तारी और संपत्तियों की कुर्की कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, राजनीतिक प्रतिशोध नहीं।

कांग्रेस की घबराहट: भाजपा इसे कांग्रेस की हताशा बता रही है। उनका दावा है कि जब सच सामने आने लगता है, तो कांग्रेस ‘विक्टिम कार्ड’ खेलकर जनता की सहानुभूति बटोरने की कोशिश करती है।

निष्कर्ष: सियासी टकराव के केंद्र में ‘जनमत’

वर्तमान स्थिति यह है कि छत्तीसगढ़ की राजनीति अब बंद कमरों और अदालतों से निकलकर सड़क पर ‘सर्वे’ के रूप में आ गई है। कांग्रेस इसे “लोकतंत्र की हत्या” बता रही है, जबकि भाजपा इसे “भ्रष्ट चेहरों का बेनकाब होना” करार दे रही है। भिलाई की यह घटना आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति को और अधिक ध्रुवीकृत (Polarize) करेगी।

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