नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष पूरे होने पर हुई विशेष चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्रियों पर तीखा हमला बोला।
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विभाजन का कारण ‘तुष्टिकरण’: गृह मंत्री शाह ने आरोप लगाया कि पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ‘वंदे मातरम्’ को सीमित करके इसके “दो टुकड़े” किए, और यहीं से तुष्टिकरण की राजनीति की शुरुआत हुई, जिसने अंततः देश के विभाजन के बीज बोए। उन्होंने कहा, “अगर कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति के तहत ‘वंदे मातरम्’ का बंटवारा नहीं किया होता, तो देश का भी बंटवारा नहीं होता।”
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बंगाल चुनाव से लिंक करने पर खारिज: शाह ने उन विपक्षी आरोपों को खारिज कर दिया कि यह बहस आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत का महिमामंडन करने को बंगाल चुनाव से जोड़ना गलत है, और आलोचकों को इसकी विरासत और अहमियत पर “नए सिरे से सोचने” की ज़रूरत है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह गीत केवल बंगाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह “भारत माता के प्रति भक्ति” और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को जगाने का ‘मंत्र’ है।
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आपातकाल पर निशाना: उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि जब ‘वंदे मातरम्’ के 100 साल पूरे हुए, तब देश में आपातकाल लगाया गया और इस गीत को बोलने वालों को जेल भेजा गया, जिसका मतलब है कि ‘वंदे मातरम्’ का विरोध कांग्रेस के “खून में” है।
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संसद से वॉकआउट का आरोप: गृह मंत्री ने विपक्षी गठबंधन (‘इंडी अलायंस’) के सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब संसद में ‘वंदे मातरम्’ का गान होता है, तो कई सदस्य सदन से बाहर चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि वह ऐसे सदस्यों की सूची सदन के पटल पर रखेंगे।
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राष्ट्रीय गीत की प्रासंगिकता: शाह ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल आज़ादी के समय ही नहीं, बल्कि ‘अमृतकाल’ में भारत को ‘विकसित भारत’ बनाने की दिशा में भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि यह चर्चा युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को ‘वंदे मातरम्’ के महत्व को समझाने में मदद करेगी।








