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अधूरी रह गई रक्षा की कोशिश: माँ की बाहों में ही सो गया 4 साल का त्रिशान, जबलपुर हादसे की सबसे गमगीन तस्वीर

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माँ का आंचल बना बेटे का आखिरी सहारा, पानी की गहराई में भी नहीं छूटा साथ


जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में शुक्रवार शाम हुए भीषण क्रूज हादसे ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। जैसे-जैसे रेस्क्यू ऑपरेशन आगे बढ़ रहा है, नर्मदा की लहरों के बीच से ऐसी दास्तां निकलकर सामने आ रही हैं, जिन्हें सुनकर कलेजा मुंह को आता है। शनिवार सुबह जब गोताखोरों ने लापता लोगों की तलाश में पानी की गहराइयों को खंगाला, तो वहां “ममता के बलिदान” का एक ऐसा दृश्य मिला जिसे देखकर बचाव दल की भी चीख निकल गई।

जिंदगी की आखिरी जंग और अटूट ममता

हादसे का शिकार हुई मरीना मैसी का शव जब पानी से बाहर निकाला गया, तो उनके साथ उनके 4 वर्षीय बेटे त्रिशान का भी शव था। मौत के उस भयावह मंजर में भी मरीना ने अपने बेटे का साथ नहीं छोड़ा था। प्रत्यक्षदर्शियों और रेस्क्यू टीम के अनुसार, माँ ने अपनी लाइफ जैकेट के भीतर अपने मासूम को पूरी तरह समेट लिया था। वह आखिरी सांस तक उसे बचाने की कोशिश करती रहीं।

लहरों का वेग भी न तोड़ सका बंधन

कुदरत का कहर इतना भीषण था कि क्रूज पलक झपकते ही समा गया, लेकिन मरीना की ममता काल से भी बड़ी साबित हुई। पानी के भीतर तेज बहाव के बावजूद माँ ने अपने कलेजे के टुकड़े को अपने सीने से इतनी मजबूती से चिपका रखा था कि दोनों के शव एक साथ ही बरामद हुए। यह तस्वीर इस बात की गवाह है कि एक माँ अपने बच्चे की रक्षा के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना मौत से भी टकरा सकती है।

बचाव कार्य और वर्तमान स्थिति

  • बरामद शव: अब तक इस दर्दनाक हादसे में 9 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है।

  • सुरक्षित बची बेटी: दुखद बात यह है कि कुछ समय पहले तक जो परिवार क्रूज पर हंस-खेल रहा था, उसमें से अब केवल बेटी ही सुरक्षित बची है, जिसने अपनी आंखों के सामने अपनी माँ और भाई को लहरों में ओझल होते देखा।

  • प्रशासनिक मुस्तैदी: स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमें अभी भी रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं।

“यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक माँ की वह आखिरी कोशिश है जो भले ही नाकाम रही, लेकिन उसने साबित कर दिया कि माँ का आंचल ही बच्चे का अंतिम और सबसे सुरक्षित सहारा होता है।”

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