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अधूरी रह गई रक्षा की कोशिश: माँ की बाहों में ही सो गया 4 साल का त्रिशान, जबलपुर हादसे की सबसे गमगीन तस्वीर

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माँ का आंचल बना बेटे का आखिरी सहारा, पानी की गहराई में भी नहीं छूटा साथ


जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में  हुए भीषण क्रूज हादसे ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। जैसे-जैसे रेस्क्यू ऑपरेशन आगे बढ़ रहा है, नर्मदा की लहरों के बीच से ऐसी दास्तां निकलकर सामने आ रही हैं, जिन्हें सुनकर कलेजा मुंह को आता है। शुक्रवार सुबह जब गोताखोरों ने लापता लोगों की तलाश में पानी की गहराइयों को खंगाला, तो वहां “ममता के बलिदान” का एक ऐसा दृश्य मिला जिसे देखकर बचाव दल की भी चीख निकल गई।

जिंदगी की आखिरी जंग और अटूट ममता

हादसे का शिकार हुई मरीना मैसी का शव जब पानी से बाहर निकाला गया, तो उनके साथ उनके 4 वर्षीय बेटे त्रिशान का भी शव था। मौत के उस भयावह मंजर में भी मरीना ने अपने बेटे का साथ नहीं छोड़ा था। प्रत्यक्षदर्शियों और रेस्क्यू टीम के अनुसार, माँ ने अपनी लाइफ जैकेट के भीतर अपने मासूम को पूरी तरह समेट लिया था। वह आखिरी सांस तक उसे बचाने की कोशिश करती रहीं।

रेस्क्यू ऑपरेशन में भावुक हुए जांबाज

भारतीय सेना की 411 पैराशूट फील्ड कंपनी के गोताखोरों ने इस कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया। अभियान में शामिल एक गोताखोर ने बताया कि वह दृश्य उनके जीवन के सबसे कठिन अनुभवों में से एक था। डूबे हुए क्रूज जहाज की एक संकरी खिड़की के पीछे फंसी मरीना ने अपने बेटे त्रिशान को इतनी मजबूती से पकड़ रखा था कि मौत भी उनकी इस पकड़ को ढीली नहीं कर पाई।

खिड़की के पीछे फंसी थी दो जिंदगियां

गोताखोरों के अनुसार, बचाव कार्य के दौरान सबसे बड़ी चुनौती मां-बेटे को एक साथ बाहर निकालने की थी। उन्होंने बताया:

“उन्हें बाहर निकालना बहुत मुश्किल साबित हो रहा था। वे जहाज की एक छोटी सी खिड़की के पीछे फंसे हुए थे। मां की अपने बच्चे पर पकड़ इतनी ज्यादा मजबूत थी कि वह मौत के बाद भी ढीली नहीं पड़ रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे वह आखिरी सांस तक अपने बच्चे को सुरक्षा देना चाहती थीं।”

अंतिम समय तक बचाने की कोशिश

शवों की स्थिति को देखकर यह स्पष्ट था कि जब जहाज में पानी भरना शुरू हुआ होगा, तब मरीना ने अपने बेटे को सुरक्षित निकालने की हर संभव कोशिश की होगी। जगह कम होने और मां-बेटे के आपस में लिपटे होने के कारण गोताखोरों को उन्हें बाहर निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी, क्योंकि वे किसी भी हाल में मां की उस ‘अंतिम ममता’ को अलग नहीं करना चाहते थे।

लहरों का वेग भी न तोड़ सका बंधन

कुदरत का कहर इतना भीषण था कि क्रूज पलक झपकते ही समा गया, लेकिन मरीना की ममता काल से भी बड़ी साबित हुई। पानी के भीतर तेज बहाव के बावजूद माँ ने अपने कलेजे के टुकड़े को अपने सीने से इतनी मजबूती से चिपका रखा था कि दोनों के शव एक साथ ही बरामद हुए। यह तस्वीर इस बात की गवाह है कि एक माँ अपने बच्चे की रक्षा के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना मौत से भी टकरा सकती है।

बचाव कार्य और वर्तमान स्थिति

  • बरामद शव: अब तक इस दर्दनाक हादसे में 9 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है।

  • सुरक्षित बची बेटी: दुखद बात यह है कि कुछ समय पहले तक जो परिवार क्रूज पर हंस-खेल रहा था, उसमें से अब केवल बेटी ही सुरक्षित बची है, जिसने अपनी आंखों के सामने अपनी माँ और भाई को लहरों में ओझल होते देखा।

  • प्रशासनिक मुस्तैदी: स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमें अभी भी रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं।

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