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## NEET UG 2026: लखनऊ में अनोखा नजारा, डॉक्टर बनने का सपना लेकर परीक्षा देने पहुंचे 69 साल के ‘युवा’ अभ्यर्थी

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69 की उम्र और डॉक्टर बनने का जज्बा

नई दिल्ली 21जून :  नीट यूजी 2026 की री-एग्जाम में जहाँ लाखों युवा डॉक्टर बनने का सपना लेकर परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे, वहीं लखनऊ के आलमबाग स्थित गुरु नानक महाविद्यालय गर्ल्स इंटर कॉलेज केंद्र पर एक अनोखा नजारा देखने को मिला. यहाँ 69 वर्षीय अशोक बहार जैसे ही नीली शर्ट, जींस और काला चश्मा पहनकर पहुंचे, तो वहाँ मौजूद छात्र, अभिभावक और सुरक्षाकर्मी उन्हें देखते ही रह गए. उम्र के इस पड़ाव पर देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक NEET में बैठना हर किसी के लिए चर्चा और प्रेरणा का विषय बन गया.

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सुरक्षा जांच को लेकर जताई नाराजगी

इस बार पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम थे. बायोमेट्रिक सत्यापन और सघन जांच के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा था. सुरक्षा कर्मियों ने नियमों का हवाला देते हुए अशोक बहार से उनका चश्मा, बेल्ट और घड़ी उतरवा ली. इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि बिना चश्मे के उन्हें देखने में परेशानी होती है. हालांकि, नियमों के आगे उन्हें झुकना पड़ा और उन्होंने अपना सामान अपने ड्राइवर अवधेश के पास छोड़ दिया. परीक्षा केंद्र पर कलावा, चेन, जूते-मोजे और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित रहे.

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सपनों की कोई उम्र नहीं होती: क्यों बनना चाहते हैं डॉक्टर?

चंदरनगर (आलमबाग) के रहने वाले अशोक बहार एक खाद कंपनी में मार्केटिंग प्रमुख रह चुके हैं और उन्होंने MBA भी किया है. उनकी पत्नी डॉ. मंजुल बहार अमेरिका में डॉक्टर हैं और परिवार में कई अन्य लोग भी इसी पेशे में हैं. अशोक जी ने बताया:

“मुझे दवाओं और मेडिकल क्षेत्र की अच्छी जानकारी है, लेकिन बिना डिग्री के मैं किसी को सलाह नहीं दे सकता. सपनों की कोई उम्र नहीं होती. सफलता मिले या न मिले, इंसान को प्रयास कभी नहीं छोड़ना चाहिए.”

आरक्षण के लिए अब खटखटाएंगे हाई कोर्ट का दरवाजा

अशोक बहार अब वरिष्ठ नागरिकों के हक के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. उनकी मांग है कि मेडिकल शिक्षा में वरिष्ठ नागरिक अभ्यर्थियों के लिए कम से कम 1 प्रतिशत आरक्षण होना चाहिए. साथ ही, जो छात्र दोबारा परीक्षा नहीं देना चाहते, उन्हें पुराने स्कोर के आधार पर काउंसलिंग का मौका मिले. इन मांगों को लेकर वह सोमवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर करेंगे.

दूसरी ओर, परीक्षा केंद्र पर मौजूद अभिभावकों ने भी बार-बार परीक्षा होने और पेपर लीक की अफवाहों पर चिंता जताई. उनका कहना है कि सरकार को एक पारदर्शी और फूलप्रूफ व्यवस्था बनानी चाहिए ताकि छात्रों का मनोबल न टूटे.

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