Latest News
CG News:आम जनता के बीच पहुंचे राहुल गांधी , सड़क किनारे ‘चाय का आनंद’ लिया , दुकान पर जुटा कांग्रेस का “दिग्गज कुनबा” 🚨 छत्तीसगढ़ में सनसनी: जांजगीर से ISI का संदिग्ध स्लीपर सेल गिरफ्तार, देश की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील डेटा लीक करने का आरोप कोरबा में खूनी संघर्ष: आपसी विवाद में युवक की हत्या, इलाके में तनाव के बाद भारी पुलिस बल तैनात छत्तीसगढ़ का सियासी पारा हाई: एक ही कार में सवार दिखे राहुल गांधी,सचिन पायलट और भूपेश बघेल; स्वागत में भारी धक्का-मुक्की राहुल गांधी का छत्तीसगढ़ दौरा: अभनपुर प्रशिक्षण शिविर में जिला अध्यक्षों को देंगे ‘पावर’, संगठन विकेंद्रीकरण पर बड़ा मंथन ## NEET UG 2026: लखनऊ में अनोखा नजारा, डॉक्टर बनने का सपना लेकर परीक्षा देने पहुंचे 69 साल के ‘युवा’ अभ्यर्थी
Home » कोरबा » कुदुरमाल पुल बना जी का जंजाल! क्या जागेगा कोरबा प्रशासन?

कुदुरमाल पुल बना जी का जंजाल! क्या जागेगा कोरबा प्रशासन?

Share:

कोरबा (छत्तीसगढ़): ऊर्जाधानी कोरबा में इन दिनों अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि एक तरफ लोग डीजल की किल्लत से परेशान हैं, तो दूसरी तरफ बुनियादी ढांचे की बदहाली ने आग में घी डालने का काम किया है। क्षेत्र का महत्वपूर्ण कुदुरमाल पुल लंबे समय से क्षतिग्रस्त पड़ा है, जो अब स्थानीय जनता और परिवहन जगत के लिए ‘जी का जंजाल’ बन चुका है।

लापरवाही की कीमत: 30 किमी का अतिरिक्त चक्कर

पुल टूटने की वजह से कोरबा कोलरी क्षेत्र में चलने वाले हजारों ट्रकों को अपना रूट बदलना पड़ा है। वर्तमान में लगभग 1000 ट्रक प्रतिदिन 30 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय कर रहे हैं।

  • ईंधन की बर्बादी: जहां एक ओर डीजल की भारी कमी है, वहीं इस अतिरिक्त फेरे के कारण रोजाना हजारों लीटर डीजल व्यर्थ जल रहा है।

  • करोड़ों का नुकसान: ईंधन की इस बर्बादी से न केवल ट्रांसपोर्टर्स की कमर टूट रही है, बल्कि सरकार को भी राजस्व के रूप में करोड़ों रुपये की चपत लग रही है।

  • प्रशासनिक उदासीनता: पुल की मरम्मत को लेकर प्रशासन का रवैया अब तक टालमटोल वाला रहा है, जिससे आम जनता में भारी आक्रोश है।

दोहरी मार: डीजल संकट और ट्रैफिक का दबाव

कोरबा क्षेत्र में वर्तमान में डीजल की आपूर्ति वैसे ही बाधित है। पंपों पर घंटों इंतजार करने के बाद जब ट्रकों को डीजल मिलता है, तो वह टूटे पुल के कारण लंबे रास्तों की भेंट चढ़ जाता है। अतिरिक्त दूरी तय करने से ट्रकों का मेंटेनेंस बढ़ रहा है और गंतव्य तक पहुँचने में समय की बर्बादी हो रही है। साथ ही, भारी वाहनों के रूट बदलने से अन्य ग्रामीण सड़कों पर भी दबाव और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।

जनता की पुकार: तत्काल हो समाधान

क्षेत्रीय नागरिकों और व्यापारिक संगठनों की मांग है कि:

  1. कुदुरमाल पुल की शीघ्र मरम्मत या नए पुल का निर्माण युद्ध स्तर पर शुरू हो।

  2. जब तक पुल तैयार न हो, तब तक वैकल्पिक सुगम मार्ग की व्यवस्था की जाए।

  3. डीजल की किल्लत को दूर करने के लिए प्रशासन सख्त कदम उठाए।

क्या प्रशासन इस आर्थिक और पर्यावरणीय बर्बादी को रोकने के लिए अपनी नींद से जागेगा? या फिर जनता को इसी तरह अव्यवस्थाओं की मार झेलनी होगी?

Leave a Comment

latest news