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ब्लैकबक का बेंगलुरु छोड़ने का फैसला: शहर के गड्ढों और ट्रैफिक से तंग हो गए कंपनी के मालिक

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Blackbuck decides to leave Bengaluru: बेंगलुरु स्थित डिजिटल ट्रकिंग प्लेटफॉर्म ब्लैकबक ने शहर से अपना ऑफिस हटाने का निर्णय लिया है, जो शहर के बुनियादी ढांचे की खराब स्थिति को उजागर करता है। कंपनी के सीईओ और को-फाउंडर राजेश कुमार याबाजी ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि बेंगलुरु के आउटर रिंग रोड (ORR) स्थित ऑफिस में काम करना मुश्किल हो गया है क्योंकि सड़कों पर गड्ढे और धूल भरी पड़ी है, और प्रशासन की ओर से इसे ठीक करने की कोई खास इच्छा नहीं दिखती।

क्या है ब्लैकबक?
ब्लैकबक ट्रक ऑपरेटरों के लिए भारत के सबसे बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म में से एक है, जो ट्रक ड्राइवरों को ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करता है, जैसे कि भुगतान, वाहन ट्रैकिंग, माल ढुलाई के लिए बाजार और फाइनेंस विकल्प। कंपनी की वैल्यू 10,900 करोड़ रुपये से अधिक है और यह बेंगलुरु के आईटी कॉरिडोर में स्थित है।

शहर के बुनियादी ढांचे की समस्या
ब्लैकबक का फैसला शहर के बुनियादी ढांचे की खराब स्थिति को दर्शाता है, जिसमें सड़कों पर गड्ढे, ट्रैफिक जाम और धूल शामिल हैं। इससे न केवल आम लोगों को परेशानी होती है, बल्कि बड़ी कंपनियों को भी प्रभावित करती है। ग्रेटर बेंगलुरु आईटी कंपनीज एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के महासचिव कृष्ण कुमार गौड़ा ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है और सरकार से तुरंत ध्यान देने का आग्रह किया है।

भविष्य की संभावनाएं
ब्लैकबक का फैसला एक चेतावनी संकेत है कि यदि शहर के बुनियादी ढांचे में सुधार नहीं किया गया, तो और भी कंपनियां बेंगलुरु छोड़ सकती हैं। इससे शहर की अर्थव्यवस्था और आईटी सेक्टर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। सरकार को इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान देने और शहर के बुनियादी ढांचे में सुधार करने की आवश्यकता है ¹

इस इलाके में 500 से ज्यादा कंपनियां

इस ORR इलाके में करीब 500 से ज्यादा कंपनियां हैं और यहां करीब 9.5 लाख लोग रोज़ काम पर आते हैं. ये इलाका अकेले बेंगलुरु की IT आमदनी में 36 फीसदी योगदान देता है. लेकिन सड़कें उतनी ही पुरानी हैं जितनी 1996 से 2002 के बीच बनाई गई थीं. तब इस रिंग रोड को इसलिए बनाया गया था कि भारी ट्रक शहर के अंदर न आएं और ट्रैफिक कम हो. मगर अब ट्रक की जगह लोगों की भीड़ है, कंपनियों के टावर हैं, फ्लैट्स की लंबी कतारें हैं… लेकिन सड़कें वैसी की वैसी.