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जननेता बिसे यादव “गुरुजी” का निधन: एक युग का अंत, डॉ रमन सिंह को दिलाई थी भाजपा की सदस्यता

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Chhattisgarh News: दुर्ग के वरिष्ठ नेता और भाजपा के संस्थापक सदस्य बिसे यादव “गुरुजी” का 19 अगस्त 2025 को 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार आज हरनाबांधा मुक्तिधाम में किया जाएगा। उन्हें छत्तीसगढ़ के धुरंधर नेता स्व हेमचंद्र यादव का गुरु माना जाता था। बिसे यादव को लोग गुरु जी के नाम से पहचानते थे। गुरु जी ने ही डॉ रमन सिंह को भाजपा की सदस्यता दिलाई थी।

प्रारंभिक जीवन और राजनीतिक करियर

बिसे यादव ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत शिवसेना से की और मोतीलाल वोरा जैसे दिग्गज नेताओं के खिलाफ चुनाव लड़े। उनकी राजनीतिक कौशल और संगठन क्षमता ने उन्हें जिले में एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया।

बता दे कि गुरुजी ने अपने जीवन में दुर्ग की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भाजपा को जिले में स्थापित करने में अहम योगदान दिया। जिस समय प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी भाजपा का शहर में कोई झंडा उठाने वाला तक नहीं था उस दौर में उन्होंने भाजपा को शहर में खड़ा किया। पहले उन्हें भाजयुमो शहर अध्यक्ष और बाद में भाजपा शहर अध्यक्ष बनने का अवसर मिला उस समय चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों को चुनौती देना तो दूर उनके खिलाफ कोई बोलने के लिए भी कोई तैयार नहीं था,उस समय बिसे यादव ने न केवल कांग्रेसी दिग्ग्ज को चुनौती दी बल्कि अपनी राजनीतिक कौशल से कांग्रेसियों को मात दी। कांग्रेस के उस दौर में भी उन्होंने साइकिल से प्रचार कर अपनी जमानत बचा ली थी। जिस समय बिसे यादव ने मोतीलाल वोरा जैसे दिग्गज नेता के विरोध में चुनाव लड़ा शिवसेना से उस समय छत्तीसगढ़ में भाजपा का कोई वजूद नहीं होता था। हालांकि उन्होंने जिले में भाजपा को स्थापित करने अहम भूमिका निभाई लेकिन भाजपा जब सता में आई तो उन्हें सरकार की ओर से कोई तवज्जो नही मिला।

डॉ. रमन सिंह को दिलाई थी भाजपा की सदस्यता, सौंपी थी जिम्मेदारी

सन् 1986-87 में छग में भाजपा की स्थिति अच्छी नहीं थी। तब पार्टी के वरिष्ठ नेता गोविंद सारंग दुर्ग में नए नेतृत्व और सक्रिय लोगों की तलाश में पहुंचे थे। उस समय भाजपा में बिसे यादव का बड़ा नाम था। कवर्धा में भाजपा की गतिविधि शून्य होने के चलते वहां पार्टी को स्थापित करने के लिए एक नेता की तलाश जारी थी। इसी सिलसिले में गोविंद सारंग, बीसे यादव को लेकर कवर्धा पुहंचे थे।

कवर्धा में डॉ रमन सिंह शनिवर डॉक्टर के नाम से जाने जाते थे 

डॉ. रमन सिंह को उस समय कवर्धा में शनिवर डॉक्टर के नाम से जाना जाता था। इसका कारण यह था कि शनिवार के दिन वे गरीबों का निःशुल्क इलाज करते थे व दवाई देते थे। जिसके चलते वे शहर में खासे लोकप्रिय भी थे। जब गोविंद सारंग के साथ बीसे यादव डॉ. रमन सिंह से मुलाकात करने पहुंचे तब डॉ. रमन सिंह काफी व्यस्त थे।

और उन्होंने उन्हें 1 घंटे बाद मिलने की बात कही। जब वे 1 घंटे बाद पहुंचे तब भी वे मरीजों से घिरे हुए थे। देख बीसे यादव वहां से लौटने लगे, तभी रास्ते में उन स्कूटर पंचर हो गई। पंचर ठीक कराने में उन्हें समय लगना ही था इसी बहाने उनकी मुलाकात डॉ. रमन से हो गई। गोविंद सारंग और बीसे यादव ने उस चच बाद न केवल डॉ. रमन सिंह को भाजपा का प्राथमिव सदस्य बनाया, बल्कि उन्हें सदस्यता बुक भी थमा दिया।

विरासत और प्रभाव
बिसे यादव के निधन से दुर्ग की राजनीति में एक युग का अंत हो गया है। उनके योगदान और विरासत को हमेशा याद रखा जाएगा। गुरुजी के रूप में लोकप्रिय बिसे यादव ने अपने जीवन में कई लोगों को राजनीति में प्रेरित किया और उन्हें एक मजबूत नेता के रूप में याद किया जाएगा।

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