शिवाय अस्पताल की विशेषज्ञ टीम ने बिना कोई बड़ा चीरा लगाए, आधुनिक दूरबीन (लेप्रोस्कोपिक) विधि से महिला के पेट से 10 से 12 सेंटीमीटर बड़ा और करीब 600 ग्राम वजनी विशाल फाइब्रॉयड (यूटरस) सफलतापूर्वक बाहर निकाला।जिले में बिना चीरे के इस तरह की जटिल लेप्रोस्कोपिक सर्जरी करने वाला पहला अस्पताल बन गया है।
कोरबा 8 सितंबर Shivay Hospital । डेढ़ साल से असहनीय दर्द और अत्यधिक रक्तस्राव से तड़प रही 46 वर्षीय महिला को कोरबा के शिवाय हॉस्पिटल में नया जीवन मिला है। अस्पताल की विशेषज्ञ टीम ने बिना कोई बड़ा चीरा लगाए, आधुनिक दूरबीन (लेप्रोस्कोपिक) विधि से महिला के पेट से 10 से 12 सेंटीमीटर बड़ा और करीब 600 ग्राम वजनी विशाल फाइब्रॉयड (यूटरस) सफलतापूर्वक बाहर निकाला। इस उपलब्धि के साथ शिवाय हॉस्पिटल जिले में बिना चीरे के इस तरह की जटिल लेप्रोस्कोपिक सर्जरी करने वाला पहला अस्पताल बन गया है।

दिन में बदलने पड़ते थे 8 पैड, जिंदगी बन गई थी दुभर
पीड़ित महिला पिछले 18 महीनों से अत्यधिक मासिक रक्तस्राव और बड़े-बड़े थक्कों (क्लॉट्स) की गंभीर समस्या का सामना कर रही थीं। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी थी कि उन्हें दिन भर में लगभग 8 पैड बदलने पड़ते थे। इस लगातार दर्द और ब्लीडिंग ने उनके सामान्य जीवन को पूरी तरह ठप कर दिया था।
जांच में सामने आया 18 सप्ताह के गर्भ जितना बड़ा ट्यूमर
पेल्विक अल्ट्रासोनोग्राफी जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि महिला के गर्भाशय में 10 से 12 सेंटीमीटर का एक बेहद बड़ा फाइब्रॉयड था। इस विशाल ट्यूमर के कारण गर्भाशय का आकार बढ़कर लगभग 16 से 18 सप्ताह के गर्भावस्था जितना हो गया था, जिससे ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा हो गया था।
डॉ. पूर्णिमा सुरभि की अगुवाई में सफल सर्जरी
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ सर्जन डॉ. पूर्णिमा सुरभि और स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनोकोलॉजिस्ट) डॉ. पूजा कुंडू की टीम ने ओपन सर्जरी की बजाय अत्याधुनिक लेप्रोस्कोपिक तकनीक चुनने का फैसला किया।
25 जुलाई 2026 को ‘टोटल लेप्रोस्कोपिक हिस्टरेक्टॉमी’ (TLH) और ‘बाइलेटरल साल्पिंगेक्टॉमी’ प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। इस दौरान लेप्रोस्कोपिक मोर्सेलेशन (Laparoscopic Morcellation) तकनीक के जरिए इतने विशाल ट्यूमर को छोटे टुकड़ों में विभाजित कर सुरक्षित रूप से पेट से बाहर निकाल लिया गया।
मुस्कुराते हुए अस्पताल से डिस्चार्ज हुई मरीज
जटिल सर्जरी के बावजूद मरीज की रिकवरी बेहद तेजी से हुई। पूरी तरह स्वस्थ और स्थिर स्थिति (Hemodynamically Stable) में आने के बाद महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डेढ़ साल की भयानक पीड़ा से राहत मिलने पर मरीज और उनके परिजनों ने डॉ. पूर्णिमा सुरभि तथा पूरी मेडिकल टीम के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया।
शिवाय हॉस्पिटल में हुआ यह सफल ऑपरेशन कोरबा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते स्तर और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की उपलब्धता को दर्शाता हैं।
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